संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के सानिध्य में डी.एन जैन महाविद्यालय में नवीन दो मंजिला पाषाण के जिनालय का शिलान्यास प्रातःकाल7:30 बजे से मांगलिक क्रिआओं के साथ प्रारंभ होगा मुनिसंघ डी. एन जैन बोर्डिंग में विराजमान है। इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि संस्कारधानी जबलपुर में आने के उपरांत 7 दिवसीय प्रवचन माला का योग बना और उसके पश्चात यंही से श्री सिद्दचक़ महामंडल विधान की संयोजना प्रारंभ हुई।यह भगवान आदिनाथ का दरबार है तथा यह प्रांगण शहर की प्राईम लोकेशन पर है तथा हजारों परिवार इसके इर्द गिर्द बसे हुये है सभी की भावना है और यंहा पर दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है,यह मंदिर एक अच्छा स्वरुप चाहता था तथा समाज की भी भावना बहूत दिनों से थी और यंहा कि कमेटी भी चाहती थी, कहा जाता है कि जब तक योग नहीं बनता कुछ काम नहीं होता जो अंतराय था वह अंतराय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की संयोजना से ही टल गया और विधान की समाप्ति के पश्चात सभी लोगों ने निवेदन किया हालांकि हमारे आगे का कार्यक्रम निश्चित है लेकिन संस्कार धानी जबलपुर में अतिभव्य जिनालय सफेद पाषाण जिनालय का निर्माण होंने जा रहा है जिसमें नीचे तीन बेदियां होंगी तथा ऊपर की मंजिल में एक वेदी और ऊपर डोम तथा वाहरी ओर एक चौवीसी होगी। मुनि श्री ने कहा कि डी.एन. जैन वोर्डिंग परिवार को आशीर्वाद देते हुये कहा कि 1913 से यह विशाल परिसर में उसी परिवार की पांचवीं पीड़ी ने जो भाव दिखाया है उसके संकल्प के लिये सिंघई परिवार को आशीर्वाद प्रदान किया। इसके साथ शिखर के लिये छोटेलाल जी ने अपनी अनुमति प्रदान की तथा इस मंदिर की आधार शिला राकेश जैन एडवोकेट के परिवार ने अपनी स्वीकृति प्रदान की। यह मंदिर सफेद संगमरमर के पत्थरों से निर्मित होगा तथा चौवीसी भी शिखर
के साथ संपन्न होगी मुनि श्री ने सभी परिवारों को आशीर्वाद देते हुये कहा कि इस जिनालय के लिये आशीर्वाद आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागरजी महामुनिराज ने की थी तथा उनके भाव को पूर्ण करने का मेरा निमित्त बन गया।मुनि श्री ने कहा कि बड़े बाबा के पास कुंडलपुर में यह जो सपना अमित ने रखा था वह सपना साकार हो गया। गुरुदेव के ही आशीर्वाद से ही यह परिकल्पना पूर्ण हो रही है यंहा पर एक संत निवास का कार्य भी पूर्ण होना चाहिये जिससे बड़े से बड़ा संघ भी आ जाऐ तो यंही पर चतुर्मास संपन्न हो जाये शंकासमाधान की शुरुआत मुनि श्री संधानसागर महाराज ने की कार्यक्रम में अनेक लोग गुणायतन से ट्ष्टी एवं सूत्राधार के रुप में जुड़े तथा कार्यक्रम का संचालन अशोक भैया ने किया अमित पड़रिया ने किया एवं चौवीसी एवं मंदिर निर्माण के पुण्यार्जकों के नाम की घोषणा की गई।प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं सुवोध जैन कामरेड ने बताया आगामी 25 फरवरी से 2 मार्च तक बुढ़ार (शहडोल) में मुनिसंध के सानिध्य में श्री 1008 जिनविंव पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव का आयोजन मुनिसंध के सानिध्य में होगा चूंकी मुनि संघ का पैदल विहार होता है अतः उपरोक्त आयोजन के लिये संस्कारधानी जबलपुर से मुनिसंध का शीग्र मंगलविहार होंने की संभानाये है।शंकासमाधान कार्यक्रम में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि “किसी के दान को सार्वजनिक रुप से घोषित करने में कोई बुराई नहीं” दान एक सत्कर्म है,अतः दान की अनुमोदना अवश्य करना चाहिये जिससे आपका भी पुण्य बढ़ सके।मुनि श्री ने कहा कि दान के लिये अनुरोध करो लेकिन किसी को इतना आग्रह भी मत करो कि आदमी धर्म से ही विमुख हो जाये।
मुनि श्री ने क्षींण हो रही संवेदनाओं पर अपनी अभिव्यक्ति करते हुये कहा कि वर्तमान समय में “कैसे हो पायेगी इंसान की पहचान दोंनों ही नकली हो गये आंसू और मुस्कान” के प्रश्न का उत्तर देते हुये कहा कि यह हमारी क्षींण हो रही मनोवृत्ती की पहचान है, मनुष्य के अंदर की संवेदनायें बुरी तरह सोई हुई है जिसे हम लोगों को जगाना चाहिये मुनि श्री ने कहा कि णमोकार महामंत्र एक सिद्धमंत्र है अतः णमोकार महामंत्र सभी को जपना ही चाहिये इससे आपके ऊपर आने वाली बाधायें नष्ट हो जाती है।


