डिकासा, लॉर्ड ऑफ ड्रिंक और ओपियम में नियमों की धज्जियां, कार्रवाई के बजाय चेतावनी देकर छोड़ा
जबलपुर। शहर में देर रात तक खुले पब और बारों पर पुलिस की सख्ती सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रही है। रविवार रात करीब एक बजे पुलिस ने दीनदयाल चौक स्थित डिकासा, बिलहरी रोड के लॉर्ड ऑफ ड्रिंक और मदन महल स्थित ओपियम पब में एक के बाद एक दबिश दी, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि खुलेआम नियमों का उल्लंघन मिलने के बावजूद किसी भी पब पर कोई वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई।
जबकि नियमानुसार रात 12 बजे के बाद शराब परोसना और तेज आवाज में डीजे बजाना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद तीनों पबों में युवक-युवतियां नशे में झूमते मिले और डीजे तेज आवाज में चलता रहा।
सीएसपी रितेश शिव के नेतृत्व में पुलिस टीम रात करीब एक बजे दीनदयाल चौक स्थित डिकासा पब पहुंची। उल्लेखनीय है कि इसी पब में कुछ दिन पहले विवाद के बाद एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है, फिर भी यहां देर रात तक शराब पार्टी चल रही थी। पुलिस टीम ने देखा कि अंदर तेज आवाज में डीजे बज रहा था और बड़ी संख्या में युवक-युवतियां मौजूद थे, लेकिन मौके पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
इसी तरह डीएससी बीएस गोठरिया की टीम रात 12.17 बजे बिलहरी रोड स्थित लॉर्ड ऑफ ड्रिंक पहुंची, जहां सौ से अधिक लोग शराब के नशे में झूमते पाए गए। पुलिस ने केवल मैनेजर को “रात 12 बजे के बाद पब बंद रखने” की हिदायत देकर छोड़ दिया।
तीसरी कार्रवाई केंट सीएसपी उदयभान बागरी के नेतृत्व में रात 12.45 बजे मदन महल स्थित ओपियम बार में की गई। यहां भी बार खुला मिला और शराब परोसी जा रही थी। जब पुलिस ने शराब परोसने और डीजे संचालन से जुड़े दस्तावेज मांगे तो पब मैनेजर कोई भी वैध अनुमति पत्र नहीं दिखा सका। इसके बावजूद पुलिस ने कोई केस दर्ज नहीं किया और सिर्फ चेतावनी देकर टीम लौट गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब तीनों जगह स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन मिला, तो आबकारी एक्ट और पुलिस एक्ट के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या यह सिर्फ “औपचारिक रेड” थी या फिर पब संचालकों को कानून से खिलवाड़ करने का खुला मौका दे दिया गया?
शहर में आम नागरिकों पर छोटी-छोटी बातों पर चालान और एफआईआर करने वाली पुलिस की यह नरमी अब सवालों के घेरे में है।


