कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने किया मेले का भ्रमण, मिलेट्स व्यंजनों से हुए प्रभावित
कृषि विभाग द्वारा कमला नेहरू सामुदायिक भवन बालाघाट में 08 से 12 फरवरी 2026 तक आयोजित जिला स्तरीय कृषि मेला एवं प्रदर्शनी के चौथे दिन 11 फरवरी को “एक जिला–एक उत्पाद” (ODOP) योजना के अंतर्गत विशेष क्रेता-विक्रेता सेमीनार का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य मोटे अनाज मिलेट्स—ज्वार, बाजरा, मक्का, रागी, कोदो, कुटकी की खेती और भोजन में उनके उपयोग को प्रोत्साहित करना तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है।
सेमीनार का आयोजन एमपीआईडीसी (MPIDC) के तत्वावधान में किया गया, जिसमें कार्यकारी निदेशक श्री अनिल कुमार राठौर (IAS) विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस दौरान बालाघाट जिले के प्रसिद्ध चिन्नौर धान के उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देने पर विस्तार से चर्चा की गई। सेमीनार में चिन्नौर उत्पादक किसान, एफपीओ प्रतिनिधि तथा चावल व्यापारी भी शामिल हुए और बाजार में इसकी मांग बढ़ाने के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।
चौथे दिन राष्ट्रीय तिलहन मिशन के अंतर्गत तिलहन कृषि मेला भी आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री श्री रामकिशोर कावरे, श्री सत्यनारायण अग्रवाल एवं समाजसेवी श्री नरेंद्र भैराम उपस्थित रहे। विशेषज्ञों द्वारा तिलहन फसलों के महत्व, तेल उत्पादन की विधियों और उनके स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानकारी दी गई। कच्ची घानी एवं तेल घानी से जुड़े युवा उद्यमियों ने भी इस अवसर पर अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम में उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय, श्री राजेश खोब्रागड़े, कृषि विशेषज्ञ डॉ. शरद बिसेन, पशुपालन विभाग से डॉ. घनश्याम परते, कृषि विज्ञान केन्द्र बड़गांव से डॉ. एस.आर. धुवारे, मुरझड़ कॉलेज से डॉ. रमेश अमूले तथा अनेक प्रगतिशील किसानों ने तिलहन, दलहन, मिलेट्स की खेती और प्राकृतिक उत्पादन पर उपयोगी जानकारी प्रदान की।
मेले के चौथे दिन जटाशंकर त्रिवेदी पीजी कॉलेज बालाघाट, कमला नेहरू कन्या महाविद्यालय तथा सरदार पटेल विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में मेले का भ्रमण किया। विद्यार्थियों ने मिलेट्स से बने व्यंजनों—जैसे कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार, बाजरा और मक्का से तैयार खाद्य पदार्थों की जानकारी प्राप्त की और इन्हें देखकर अत्यंत उत्साहित नजर आए।
पांच दिवसीय इस कृषि मेले में आम जनता के लिए विभिन्न प्रकार के जैविक उत्पाद बिक्री हेतु उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें गुड़, कच्ची घानी का तिल, मूंगफली, सरसों, अलसी का तेल, कोदो-कुटकी-रागी का आटा, हल्दी, पोहा, चना, शहद, जैविक सब्जियां एवं भाजी प्रमुख हैं। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ आकर्षक फूड स्टाल भी लगाए गए हैं, जहां रागी का डोसा, पेज, रागी के मंगोड़े, रागी-ज्वार-बाजरा की मिक्स रोटी, चिन्नौर और कोदो की खीर जैसे व्यंजन लोगों को खूब भा रहे हैं। ये व्यंजन मेले का मुख्य आकर्षण बने हुए हैं। कृषि विभाग ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस मेले का लाभ उठाएं, मिलेट्स और जैविक उत्पादों को अपनाएं तथा स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में आगे बढ़ें।


