जबलपुर। शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था एक बार फिर अव्यवस्था का शिकार नजर आ रही है। शहर और गोरखपुर क्षेत्र को जोड़ने वाले शास्त्री ब्रिज पर दिन के उजाले में भी स्ट्रीट लाइटें लगातार जलती रहती हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक लाइटों का जलना न केवल बिजली की भारी बर्बादी है, बल्कि यह नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत दर्ज कराने और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
वहीं दूसरी ओर शहर के कई मोहल्लों की तस्वीर बिल्कुल उलट है। अनेक क्षेत्रों में रात के समय स्ट्रीट लाइटें बंद रहती हैं या काफी देर से चालू की जाती हैं। सर्किट फॉल्ट, टाइमर की गड़बड़ी, मेंटेनेंस की कमी और मॉनिटरिंग के अभाव के कारण शाम ढलने के बाद भी दो से तीन घंटे तक अंधेरा पसरा रहता है। इससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
अंधेरे के कारण सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। पैदल चलने वाले, बुजुर्ग, स्कूली छात्र-छात्राएं और दोपहिया वाहन चालक विशेष रूप से जोखिम में रहते हैं। महिलाओं ने भी असुरक्षा की भावना जताई है, खासकर उन मार्गों पर जहां रोशनी अपर्याप्त है। व्यापारियों का कहना है कि पर्याप्त प्रकाश न होने से बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, जिससे कारोबार पर भी असर पड़ता है।
इतना ही नहीं, नगर निगम सीमा में हाल के वर्षों में शामिल किए गए कई गांव और नई कॉलोनियां आज भी नियमित स्ट्रीट लाइट सुविधा से वंचित हैं। वहां खंभे तो लगे हैं, लेकिन लाइटें या तो जलती नहीं हैं या महीनों से खराब पड़ी हैं। रहवासियों को अंधेरे में आवागमन करना पड़ रहा है।
नागरिकों ने मांग की है कि स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग हो, ऑटोमैटिक सेंसर और टाइमर सिस्टम को दुरुस्त किया जाए, दोषपूर्ण सर्किट तत्काल सुधारे जाएं और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही नई बस्तियों और शामिल गांवों में प्राथमिकता से रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि बिजली की बर्बादी रुके और शहर को सुरक्षित व व्यवस्थित प्रकाश व्यवस्था मिल सके।


