April 4, 2026
सी टाइम्स
हेल्थ एंड साइंस

घड़ी नहीं, सूरज बताता है खाने का सही समय, ‘सन क्लॉक’ को फॉलो करती है बॉडी



नई दिल्ली, 21 फरवरी  आमतौर पर धारणा बनी हुई है कि जब भी भूख लगे खाना खा लेना चाहिए, लेकिन आयुर्वेद इसे गलत बताता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर कोई मशीन नहीं है, बल्कि प्रकृति का हिस्सा है। इसे ठीक रखने के लिए दवाइयों या सख्त डाइट की बजाय सूरज के रिदम का सम्मान करना चाहिए। वास्तव में बॉडी सन क्लॉक के हिसाब से चलती है।



सदियों पुराना आयुर्वेद यही सिखाता आ रहा है कि खाने का समय घड़ी से नहीं, बल्कि सूर्योदय और सूर्यास्त से तय होना चाहिए। जब हम सूरज के साथ खाते हैं तो पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर अंदर से खुद ठीक होने लगता है।

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि आजकल हम घड़ी के हिसाब से जीते हैं, लेकिन शरीर सूरज के पीछे चलता है। जब हम सूरज ढलने के बाद भी भारी खाना खाते हैं तो पाचन तंत्र पर बोझ पड़ता है और कई बीमारियां शुरू हो जाती हैं। आयुर्वेद का मूल मंत्र है– जब सूरज तेज हो, तब खाएं; जब सूरज डूब जाए, तब आराम करें। इस साधारण नियम को अपनाकर लोग बिना किसी सख्त डाइट के स्वस्थ रह सकते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, दिन के तीन मुख्य समय हैं और हर समय का खाना अलग होना चाहिए। सुबह की शुरुआत हल्के और सादे भोजन से करें। सूरज उगते ही शरीर में पाचन की आग धीरे-धीरे जलनी शुरू होती है, इसलिए भारी या तला-भुना खाना न खाएं। इसके बजाय हल्दी वाला दूध, पोहा, उपमा, इडली, पोहा, फल या हल्का दलिया जैसे खाद्य पदार्थ लें। ये पेट को आराम देते हैं, एनर्जी बढ़ाते हैं और दिनभर तरोताजा रखते हैं।

इसके बाद दोपहर का समय सबसे महत्वपूर्ण है। जब सूरज सबसे ऊपर होता है, तब पाचन की अग्नि (जठराग्नि) सबसे तेज जलती है। आयुर्वेद कहता है कि दोपहर का भोजन सबसे पौष्टिक और भरपूर होना चाहिए। इस समय दाल-चावल, रोटी-सब्जी, सांभर-चावल, घी वाली खिचड़ी खा सकते हैं। भारी और पौष्टिक भोजन दोपहर में ही पचता है, क्योंकि अग्नि मजबूत होती है।

वहीं, शाम को सूरज ढलते ही शरीर धीमा हो जाता है। पाचन की आग कमजोर पड़ जाती है, इसलिए रात का खाना हल्का और जल्दी पचने वाला होना चाहिए। सूप, खिचड़ी, मूंग दाल, नरम सब्जियां, दही-चावल या हल्की रोटी-सब्जी अच्छे विकल्प हैं। भारी, तला-भुना, मसालेदार या ज्यादा मीठा खाना रात में परेशानी पैदा करता है – जैसे अपच, भारीपन, नींद न आना या वजन बढ़ना।

आयुर्वेद में यह भी कहा गया है कि ‘जब भी भूख लगे, खाओ’ जैसी आम सलाह गलत है। भूख का समय सूरज के साथ जुड़ा होता है। सुबह हल्की भूख, दोपहर में तेज भूख और शाम को बहुत कम भूख महसूस होनी चाहिए। अगर शाम को ज्यादा भूख लग रही है तो इसका मतलब है कि दिन का खान-पान गड़बड़ है।

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