ताजियों के दीदार को उमड़ी भीड़, ढोल की गूंज के बीच निकलीं सवारियांबाबाओं को पेश किए गए प्याले, रास्ते भर बांटे गए लंगर और शरबत
जबलपुर। मोहर्रम के मातमी पर्व पर शनिवार को संस्कारधानी जबलपुर अकीदत, गम और इंसानियत के रंग में रंगी नजर आई। हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से ताजियों, सवारियों और मातमी जुलूसों का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा। शहर की सड़कों पर हजारों की संख्या में अकीदतमंद उमड़े, वहीं आकर्षक ताजियों के दीदार के लिए बड़ी संख्या में आम नागरिक भी पहुंचे।
मुहर्रम की नौवीं पर मस्जिदों, इमामबाड़ों और इबादतगाहों में नमाज, तिलावत-ए-कुरआन, मजलिस और दुआओं का आयोजन हुआ। अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश किया और देश में अमन-चैन, भाईचारे तथा खुशहाली के लिए दुआएं मांगीं।
शहर के विभिन्न मार्गों से निकले मातमी जुलूसों में पारंपरिक सवारियां आकर्षण का केंद्र रहीं। ढोल और मातमी धुनों की गूंज के बीच सवारियां अपने निर्धारित मार्गों से गुजरती रहीं। जगह-जगह लोगों ने जुलूस का स्वागत किया और बाबाओं को श्रद्धापूर्वक प्याले पेश किए। इस दौरान अकीदतमंद बड़ी संख्या में मौजूद रहे और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया।
बंद कुआं मैदान में ‘फिदा जाने शहीदाने लंगर कमेटी’ द्वारा रोजेदारों के लिए विशेष इफ्तार का आयोजन किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। वहीं शहर के विभिन्न इलाकों में लंगर-ए-हुसैनी का आयोजन किया गया, जहां सभी धर्मों के लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण किया। यह आयोजन सामाजिक समरसता और भाईचारे की मिसाल बना।
भीषण गर्मी को देखते हुए सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने जगह-जगह सबीलें लगाईं। राहगीरों और जुलूस में शामिल लोगों के लिए ठंडा पानी, रूह अफजा शरबत, दूध, फल, मिठाई तथा अन्य खाद्य सामग्री का वितरण किया गया। रास्ते भर लंगर लगाए गए, जहां हजारों लोगों ने प्रसाद स्वरूप भोजन ग्रहण किया।
शहर में इस वर्ष भी पारंपरिक शैली में सजे आकर्षक ताजिए लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। देर रात तक विभिन्न क्षेत्रों में लोगों की भीड़ ताजियों के दीदार के लिए उमड़ती रही। बच्चों और युवाओं में भी विशेष उत्साह देखने को मिला। ओमती मस्जिद तथा ऐतिहासिक मशीन वाले बाबा सरकार दरगाह को आकर्षक रोशनी से सजाया गया, जिससे पूरा क्षेत्र श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर नजर आया।
मोहर्रम के अवसर पर पूरे शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल तैनात रहा और प्रशासनिक अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रहे। शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सभी धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए।
आस्था, त्याग, सेवा और मानवता का संदेश देने जिसने शहर की सामाजिक एकता को और मजबूत किया।


