सतपुड़ा ताप विद्युत गृह की 660 मेगावाट सुपरक्रिटिकल इकाई का निरीक्षण, नवीनीकृत शेड्स का किया लोकार्पण
जबलपुर। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) के डायरेक्टर कमर्शियल मिलिंद भान्दक्कर ने सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारनी में निर्माणाधीन 660 मेगावाट क्षमता की सुपरक्रिटिकल इकाई (यूनिट-12) का विस्तृत निरीक्षण किया। प्रबंध संचालक मनजीत सिंह के निर्देशानुरूप उन्होंने परियोजना के निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लेते हुए वरिष्ठ अभियंताओं, अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना को निर्धारित समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों के साथ पूरा किया जाए। इस दौरान उन्होंने परियोजना स्थल पर तैयार किए गए नवीनीकृत शेड्स का भी विधिवत लोकार्पण किया।
परियोजना स्थल का गहन निरीक्षण
निरीक्षण के दौरान डायरेक्टर कमर्शियल ने बॉयलर एवं टरबाइन क्षेत्र में चल रहे सिविल, मैकेनिकल तथा तकनीकी कार्यों की प्रगति का अवलोकन किया। उन्होंने भेल स्टोरेज यार्ड एवं साइट कार्यालय पहुंचकर उपकरणों के रख-रखाव, सुरक्षा व्यवस्था तथा तकनीकी समन्वय की समीक्षा की। इसके साथ ही भेल कॉलोनी एवं बैचिंग प्लांट का निरीक्षण कर श्रमिकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता और गति का भी मूल्यांकन किया।
नवीनीकृत शेड्स का उद्घाटन
परियोजना स्थल पर अभिलेखों, तकनीकी उपकरणों एवं आवश्यक सामग्रियों के सुरक्षित संरक्षण के उद्देश्य से तैयार किए गए नवीनीकृत शेड्स का उन्होंने लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि इन आधुनिक शैड के उपयोग से महत्वपूर्ण अभिलेखों एवं उपकरणों को मौसम के प्रतिकूल प्रभावों से सुरक्षित रखा जा सकेगा, जिससे परियोजना प्रबंधन और कार्य निष्पादन अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी होगा।
अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक
डायरेक्टर कमर्शियल ने निरीक्षण के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में वरिष्ठ अभियंताओं के साथ परियोजना की वर्तमान प्रगति, निर्माण कार्य में आ रही व्यावहारिक चुनौतियों, संसाधनों की उपलब्धता तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को भरोसा दिलाया कि परियोजना को निर्धारित समय में पूर्ण करने के लिए आवश्यक संसाधनों एवं व्यवस्थाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 660 मेगावाट क्षमता की यह सुपरक्रिटिकल इकाई प्रदेश की बढ़ती विद्युत आवश्यकता को पूरा करने के साथ-साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता को नई मजबूती प्रदान करेगी। आधुनिक सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित यह इकाई कम कोयले एवं कम जल की खपत में अधिक दक्षता के साथ बिजली उत्पादन करेगी, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम होगा। साथ ही उन्होंने प्रबंध संचालक के विशेष निर्देश साझा करते हुए कहा कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का अक्षरशः पालन किया जाए तथा गुणवत्ता एवं सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।


