जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) की आपात कार्य परिषद (ईसी) बैठक बुधवार को अभूतपूर्व घटनाक्रम की गवाह बनी। सूत्रों के अनुसार करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बैठक में गोपनीय एजेंडे को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हुआ कि अंत में बैठक का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। चर्चा है कि बैठक के दौरान एजेंडे की प्रतियां तक फाड़ दी गईं। इस घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय परिसर में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
बताया जाता है कि कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा की अध्यक्षता में एकात्म भवन में आयोजित बैठक में अधिकांश ईसी सदस्य उपस्थित रहे, जबकि कुछ सदस्य अनुपस्थित थे। बैठक की शुरुआत में जब गोपनीय एजेंडे की प्रतियां सदस्यों को सौंपी गईं तो सभी हैरान रह गए। सूत्रों का दावा है कि एजेंडे की जानकारी पहले केवल अध्यक्ष तक ही सीमित थी।
बैठक में पहला मुद्दा हाल ही में नियमित किए गए 13 कर्मचारियों से जुड़ा था। बताया जाता है कि इस मामले में नई समिति गठित करने या कुलसचिव द्वारा जारी आदेश में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया। हालांकि अधिकांश ईसी सदस्यों ने इसे प्रशासनिक विषय बताते हुए निर्णय की जिम्मेदारी कुलगुरु और कुलसचिव पर छोड़ने की बात कही। सूत्रों के अनुसार कुलसचिव ने स्पष्ट किया कि उन्होंने 30 मार्च की ईसी बैठक में लिए गए निर्णय के अनुरूप ही आदेश जारी किया था और उसमें बदलाव का कोई औचित्य नहीं है।
दूसरा विवाद परीक्षा परिणाम और अंकसूची तैयार करने के टेंडर को लेकर सामने आया। जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में जारी निविदा में दिल्ली की एक कंपनी सबसे कम दर पर चयनित हुई थी, लेकिन उसे अब तक कार्यादेश नहीं मिला। बैठक में पुरानी फर्म से ही काम कराने का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर कई सदस्यों ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि नई और पुरानी फर्म की दरों में बड़ा अंतर है, ऐसे में पुराने ठेकेदार को काम देने पर ऑडिट आपत्तियां और जवाबदेही के सवाल उठ सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक दोनों प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बनने के बाद बैठक का माहौल गर्मा गया। इसी दौरान एजेंडे की प्रतियां वापस लेकर कथित तौर पर फाड़ दी गईं। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर विश्वविद्यालय प्रशासन या किसी ईसी सदस्य की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल बंद कमरे में हुई इस बैठक की चर्चा पूरे विश्वविद्यालय परिसर में बनी हुई है।


