हाईकोर्ट ने बनाई विशेष डिविजन बेंच
जबलपुर। मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े बहुचर्चित मामले में लंबे समय से लंबित सुनवाई अब फिर गति पकड़ने जा रही है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया ने इस प्रकरण की नियमित सुनवाई के लिए जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की विशेष डिविजन बेंच गठित कर दी है। यह विशेष पीठ 15 जुलाई से मामले की नियमित सुनवाई करेगी।
वर्ष 2019 से लंबित ओबीसी आरक्षण से संबंधित 91 याचिकाओं पर अब यही विशेष खंडपीठ सुनवाई करेगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए थे। पूर्व में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच में विस्तृत सुनवाई हुई थी तथा याचिकाकर्ताओं की दलीलें पूरी हो चुकी थीं। इसके बाद राज्य सरकार का पक्ष सुना जाना था, लेकिन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा के सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने और जस्टिस विनय सराफ के इंदौर खंडपीठ स्थानांतरण के कारण सुनवाई बाधित हो गई।
बाद में जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस वी.पी. शर्मा की बेंच ने सुनवाई शुरू की, लेकिन नई पीठ के गठन के कारण पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू होने की स्थिति बन गई थी। अब जस्टिस विनय सराफ को पुनः विशेष डिविजन बेंच में शामिल किए जाने से पहले हुई सुनवाई की निरंतरता बनी रहेगी।
ओबीसी वर्ग की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह के अनुसार, 8 जुलाई को जारी प्रशासनिक आदेश के बाद अब 15 जुलाई से सभी 91 याचिकाओं की नियमित सुनवाई होगी। प्रदेश भर के हजारों अभ्यर्थियों और उम्मीदवारों की निगाहें इस सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि इससे 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे कानूनी विवाद के अंतिम समाधान की उम्मीद बढ़ गई है।


