डी-कंजेशन पॉलिसी से सुधरेगा शहरों का ट्रैफिक, जबलपुर मॉडल पर पूरे प्रदेश की नजर
जबलपुर। मध्य प्रदेश के बड़े शहरों में लगातार बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने डी-कंजेशन पॉलिसी पर काम तेज कर दिया है। इस नीति के तहत ट्रैफिक की वैज्ञानिक स्टडी कर एलिवेटेड कॉरिडोर और अन्य यातायात सुधार परियोजनाओं की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए गूगल मैप से प्राप्त पीक ऑवर ट्रैफिक डेटा का विश्लेषण कर सड़क और कॉरिडोर का लेआउट तैयार किया जा रहा है।
प्रदेश के छह प्रमुख शहरों—जबलपुर, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और रीवा—को इस योजना में शामिल किया गया है। इनमें सबसे पहले जबलपुर का करीब 7 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनकर तैयार हो चुका है, जबकि शहर में दूसरे एलिवेटेड कॉरिडोर की तैयारी भी शुरू हो गई है।
हालांकि जबलपुर के पहले एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे ट्रैफिक दबाव अपेक्षित रूप से कम नहीं हुआ, बल्कि कई स्थानों पर जाम और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ी है। कुछ प्रभावित क्षेत्रों के रहवासियों को अपनी समस्याओं को लेकर न्यायालय का भी रुख करना पड़ा है। ऐसे में अब दूसरे कॉरिडोर से लोगों को बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, डी-कंजेशन पॉलिसी के तहत किसी भी परियोजना का डिजाइन तैयार करने से पहले प्रतिदिन गुजरने वाले वाहनों की संख्या, पीक ऑवर में जाम की स्थिति, सड़क की क्षमता, दुर्घटनाओं का रिकॉर्ड और भविष्य के यातायात का अनुमान जैसे बिंदुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। गूगल मैप से हर घंटे का ट्रैफिक डेटा लेकर उसका विश्लेषण किया जाता है, जिसके आधार पर कॉरिडोर का अंतिम लेआउट तैयार होता है।
बताया जा रहा है कि इन परियोजनाओं का तकनीकी डिजाइन ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी के सहयोग से तैयार कराया जा रहा है, जिसमें रोड सेफ्टी मानकों का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
प्रदेश के अन्य शहरों में भी परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। भोपाल में लाउखेड़ी से निगम विसर्जन घाट तक एलिवेटेड कॉरिडोर का अधिकांश निर्माण पूरा हो चुका है। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर में भी करोड़ों रुपये की लागत से एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माणाधीन हैं, जबकि रीवा के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है।
सरकार का दावा है कि डी-कंजेशन पॉलिसी के माध्यम से भविष्य में शहरों की यातायात व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और सुगम बनाई जाएगी। वहीं, जबलपुर में बनने वाला दूसरा एलिवेटेड कॉरिडोर इस नीति की सफलता की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।


