अभिनेत्री फातिमा सना शेख ने नारीवाद को लेकर खुलकर अपनी राय रखी है। फातिमा लंबे समय से खुद को नारीवादी कहने से परहेज नहीं करती रही हैं। अपनी आगामी वेब सीरीज ‘हुंकार: द रोअरÓ में जांबाज पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहीं अभिनेत्री ने कहा कि नारीवाद शब्द को लेकर समाज और फिल्म उद्योग में अब भी कई तरह की गलत धारणाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि नारीवादी होने का अर्थ पुरुषों के अधिकार छीनना नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए समान अधिकारों की मांग करना है।
फातिमा ने कहा कि कई लोग नारीवाद को आज भी एक नकारात्मक शब्द के रूप में देखते हैं। उन्हें यह देखकर हैरानी होती है कि कुछ अभिनेत्रियां खुद को नारीवादी कहने से बचती हैं। उनके मुताबिक, किसी महिला का नारीवादी होना इस बात का संकेत नहीं है कि वह पुरुषों के अधिकारों के खिलाफ है।अभिनेत्री ने कहा, नारीवादी होने का मतलब यह नहीं है कि मैं किसी पुरुष के अधिकार छीन रही हूं। मैं तो सिर्फ अपने लिए बराबरी के अधिकार मांग रही हूं। उन्होंने इस संदर्भ में अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा जोनस का उदाहरण दिया, जो सार्वजनिक रूप से खुद को नारीवादी कहती रही हैं।
फातिमा ने कहा कि खुद को नारीवादी कहने से किसी कलाकार के प्रशंसकों की संख्या कम नहीं होती। उन्होंने प्रियंका चोपड़ा का उदाहरण देते हुए कहा कि अभिनेत्री खुले तौर पर नारीवाद की बात करती हैं और इसके बावजूद उनकी बड़ी संख्या में पुरुष प्रशंसक हैं।फातिमा के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की नीयत स्पष्ट हो और वह अपनी बात सही तरीके से लोगों तक पहुंचाए तो दर्शक उसे समझते हैं। उन्होंने कहा कि किसी विचार को लेकर लोगों के बीच बनी गलत धारणा को बातचीत और स्पष्ट सोच के माध्यम से बदला जा सकता है।फातिमा सना शेख आगामी वेब सीरीज ‘हुंकार: द रोअरÓ में एक पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रही हैं। कहानी एक ऐसे संवेदनशील मामले के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जांच फातिमा का किरदार करता है। मामले में अनीत पड्डा द्वारा निभाई गई एक नाबालिग लड़की का किरदार एक आध्यात्मिक गुरु पर यौन शोषण का आरोप लगाता है।फातिमा ने इस परियोजना को अपने करियर के सबसे महत्वपूर्ण और सीख देने वाले अनुभवों में से एक बताया है। उनका कहना है कि इस सीरीज के दौरान उन्हें एक कलाकार के रूप में अपनी राय रखने और रचनात्मक प्रक्रिया में भाग लेने का पूरा अवसर मिला।
अभिनेत्री के मुताबिक, इस परियोजना की सबसे खास बात यह रही कि निर्माताओं ने उन्हें हमेशा बराबरी का दर्जा दिया और उनकी राय को महत्व दिया। उन्होंने कहा कि किसी कलाकार के लिए ऐसा माहौल महत्वपूर्ण होता है, जहां वह अपनी बात खुलकर रख सके और उसकी राय को गंभीरता से लिया जाए।


