जयपुर। राजस्थान की सियासत में बुधवार रात उस वक्त अचानक भूचाल आ गया, जब मुख्यमंत्री अप्रत्याशित और असामान्य रूप से आनन-फानन में अपने आवास से सीधे प्रदेश भाजपा मुख्यालय पहुंच गए। मुख्यमंत्री की आवाजाही के दौरान अपनाए जाने वाले तयशुदा सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल और रूट-लाइनिंग को दरकिनार करते हुए जिस हड़बड़ी में यह काफिला निकला, उसने पुलिस महकमे से लेकर राजनीतिक हलकों तक में हड़कंप मचा दिया। सूत्रों के अनुसार, इस हड़बड़ाहट की मुख्य वजह वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ की कथित नाराजगी की खबर का पार्टी कार्यालय से बाहर लीक होना और सोशल मीडिया पर तेजी से फ्लैश होना था।
प्रत्यक्षदर्शियों और प्रशासनिक गलियारों से छनकर आ रही जानकारी के मुताबिक, बुधवार रात मुख्यमंत्री के मूवमेंट के दौरान सामान्य प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो सका: तैयारी से पहले ही निकला काफिला : सामान्यतः मुख्यमंत्री के किसी भी दौरे से पहले संबंधित रूट पर भारी पुलिस जाब्ता, पायलट-एस्कॉर्ट गाड़ियां और ट्रैफिक डायवर्जन की पुख्ता व्यवस्था की जाती है। लेकिन कल रात पूरा पुलिस बंदोबस्त तैनात होने से पहले ही मुख्यमंत्री का काफिला आवास से रवाना हो गया।
आधा-अधूरा ट्रैफिक डायवर्जन : आनन-फानन में रूट पर उस वक्त मौजूद सीमित पुलिसकर्मियों ने ही मशक्कत करते हुए ट्रैफिक को रोका और आधी-अधूरी खाली सड़क के बीच से मुख्यमंत्री की गाड़ी को निकालना पड़ा।कार्यालय से बाहर आई ‘नाराजगी की खबर’, 9:30 बजे से पहले हुआ सोशल मीडिया पर ब्लास्ट इस अचानक हुई सियासी दौड़-भाग के केंद्र में भाजपा के कद्दावर नेता राजेंद्र राठौड़ की नाराजगी का मामला बताया जा रहा है:
दफ्तर से लीक हुई बात : भाजपा मुख्यालय के भीतर चल रहे घटनाक्रम और राजेंद्र राठौड़ की नाराजगी से जुड़ी आंतरिक चर्चाएं अप्रत्याशित रूप से कार्यालय की चारदीवारी से बाहर आ गईं। सोशल मीडिया पर वायरल : रात करीब साढ़े नौ बजे से पहले ही यह खबर और अंदरखाने की तनातनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फ्लैश होने लगी। जैसे ही इस बात की भनक सत्ता और संगठन के शीर्ष स्तर पर लगी, डैमेज कंट्रोल की कवायद तेज हो गई।
खबर सार्वजनिक होते ही मुख्यमंत्री बिना किसी औपचारिक तैयारी या सुरक्षा इंतजार के सीधे भाजपा मुख्यालय पहुंचे, ताकि नाराज खेमों से संवाद स्थापित कर मामले को तूल पकड़ने से रोका जा सके। मुख्यालय में देर रात तक वरिष्ठ पदाधिकारियों और प्रमुख नेताओं के बीच बंद कमरे में मंथन चलता रहा।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावी और संगठनात्मक समीकरणों के बीच वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी खुलकर सतह पर आना पार्टी अनुशासन और रणनीति के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है। फिलहाल संगठन के रणनीतिकार यह पता लगाने में भी जुटे हैं कि बंद कमरे की यह संवेदनशील सूचना आखिर लीक होकर सोशल मीडिया तक कैसे पहुंची।


