प्रबंधन,नपाध्यक्ष के नेतृत्व में शुद्ध पेयजल की मिशाल
जैतहरी-सबसे सस्ता शुद्ध पेयजल सप्लाई का कीर्तिमान रचा
अनपूपुर । मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों में कैसे काम होना चाहिए,इसका उदाहरण पेश कर रही है नगर परिषद जैतहरी।यहां के निर्वाचित अध्यक्ष उमंग अनिल कुमार गुप्ता के नेतृत्व में जैतहरी में विकास केवल कागजो पर नहीं,बल्कि धरातल पर दिख रहा है।सड़क, स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था के साथ-साथ अब सबसे बुनियादी जरूरत-शुद्ध पेयजल के क्षेत्र में जैतहरी ने ऐसा मानक स्थापित किया है,देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सरकार बनने के बाद म.प्र. की भाजपा सरकार ने मुख्यमंत्री शहरी नल जल योजना के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने जैतहरी नगर को स्वीकृत मिली थी।
जैतहरी नगर परिषद ने अपने जल शोधन संयंत्र को केवल एक मशीन नहीं,बल्कि एक जन-स्वास्थ्य मिशन बना दिया है।
अक्सर देखा जाता है कि नदियों का पानी सीधे टंकियों में भेज दिया जाता है।जैतहरी में अध्यक्ष जी के निर्देश पर एक-एक बूंद पानी वैज्ञानिक पद्धति से 10 चरणों में शुद्ध होकर घरों तक पहुंच रहा है।प्रदेश के हर नगरीय निकाय के लिए यह प्रकिया समझना जरूरी है।स्त्रोत से संग्रह- सबसे पहले नदी के जल को जल ग्रहण कुएं से पंप द्वारा खींचकर कच्चे जल के रूप में संयंत्र तक लाया जाता है। वायु संचार द्वारा शुद्धिकरण-इस कच्चे जल में हवा मिलाकर हानिकारक गैसों को बाहर निकाला जाता है, जिससे पानी में दुर्गंध और लौह तत्व खत्म होते हैं।
वैज्ञानिक खुराक और पूर्व कीटाणुशोधन-फिर आवश्यकता अनुसार फिटकरी और चूने की रासायनिक खुराक मिलाई जाती है और पूर्व कीटाणुशोधन किया जाता है,जिससे गंदगी के कण एक साथ जुड़ने लगते हैं। गुच्छों का निर्माण और बैठाना-तीव्र मिश्रक यंत्र से रसायनों को मिलाने के बाद गुच्छक यंत्र में पानी को धीरे-धीरे हिलाकर छोटे कणों को बड़े गुच्छों में बदला जाता है।इन गुच्छों का नलिका निः सादक और निर्मलीकरण सह निःसादन कुंड में नीचे बैठा दिया जाता है,जिससे सारी गंदगी तल में रह जाती है।अंतिम सुरक्षा चक्र-इसके बाद तीव्र बालू छन्ना (रत फिल्टर) से पानी को बारीक छाना जाता है और अंतिम चरण में कीटाणुशोधन द्वारा रोगाणुओं का पूरी तरह नाश किया जाता है।यह रोगाणुनाशन ही पानी को पीने योग्य बनाता है।सुरक्षित भंडारण और वितरण-इस स्वच्छ जल को स्वच्छ जल भंडार में सुरक्षित रखा जाता है,उसकी जल गुणवत्ता का परीक्षण किया जाता है,और फिर पंप द्वारा उच्च जलाशय टंकी तक भेजकर वितरण प्रणाली के माध्यम से हर घर में पहुंचाया जाता है।
नेतृत्व में सोच पहले
जांच,फिर आपूर्ति
अध्यक्ष उमंग अनिल गुप्ता ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना जल गुणवत्ता परीक्षण के एक भी घर में पानी की आपूर्ति नहीं होगी।कच्चे जल और स्वच्छ जल दोनो की जांच अनिवार्य है। यह पारदर्शिता और जवाबदेही ही जैतहरी को अलग बनाती है।
यह केवल पानी की योजना नहीं है यह भविष्य की स्वास्थ्य सुरक्षा है।शुद्ध जल से डायरिया,टायफाइड और पीलिया जैसी बीमारियों पर रोक लगेगी,बच्चों का स्वास्थ्य सुधरेगा।नगर परिषद जैतहरी का यह प्रयास बताता है कि यदि नेतृत्व में इच्छाशक्ति और विज्ञान का समन्वय हो,तो छोटी से छोटी नगर परिषद भी प्रदेश के लिए बड़ा उदाहरण बन सकती है।यह मॉडल मध्यप्रदेश के हर नगर निकाय को अपनाना चाहिए।जैतहरी में शुद्ध पेयजल दोनो टाइम सुबह डेढ़ घंटे तथा शाम को एक घंटा जल आपूर्ति किया जाता है।सबसे आश्चर्यजनक किन्तु सत्य यह है कि देश के नगरीय निकायों में जैतहरी नगर मे पैंतीस रूपए महीने जलकर लिया जाता है।दोनो टाइम जल आपूर्ति कर जन सेवा के क्षेत्र में अद्वितीय नेतृत्व क्षमता प्रदर्शित किया है।प्रदेश व संभाग में ऐसा कोई नगरीय निकाय नहीं है जहां पैंतीस रूपए जलकर लेकर शुद्ध पेयजल दोनो टाइम नियमित करने की व्यवस्था है।जैतहरी में आय के साधन नगण्य है,आर्थिक स्थिति की दृष्टि से संभाग में सबसे कमजोर व गरीब निकाय है।


