सिवनी (मप्र) | डिजिटल इंडिया का नारा जहाँ पारदर्शिता की बात करता है, वहीं सिवनी जिले के बरघाट सिविल अस्पताल में स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। यहाँ डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र बनवाना ग्रामीणों के लिए किसी ‘सौदाबाजी’ से कम नहीं है। अस्पताल में पदस्थ कर्मचारी संध्या ठाकुर पर ग्रामीणों ने अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए हैं।
*वसूली का रेट कार्ड: ₹200 से ₹500 तक की डिमांड*
अस्पताल के सूत्रों और पीड़ित ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, जो सेवा शासन द्वारा निःशुल्क या न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध होनी चाहिए, उसके लिए यहाँ खुलेआम पैसे मांगे जा रहे हैं।
* अवैध मांग: कर्मचारी द्वारा प्रमाण पत्र के एवज में ₹200 से ₹500 तक वसूले जा रहे हैं।
* प्रताड़ना: जो ग्रामीण पैसे देने से इनकार करते हैं, उन्हें “सर्वर डाउन” या “दस्तावेजों में कमी” का बहाना बनाकर हफ़्तों चक्कर लगवाए जाते हैं।
*प्रबंधन की चुप्पी: मिलीभगत या अनदेखी*?
हैरानी की बात यह है कि अस्पताल परिसर के भीतर हो रही इस लूट की जानकारी उच्च अधिकारियों को होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का सवाल है कि क्या इस अवैध वसूली का हिस्सा ऊपर तक जाता है? अधिकारियों की यह चुप्पी भ्रष्ट कर्मचारियों के हौसले और बुलंद कर रही है।
*आक्रोशित ग्रामीण: आंदोलन की दी चेतावनी*
बरघाट के दूर-दराज से आने वाले मजदूरों और किसानों में इस व्यवस्था के खिलाफ भारी रोष है। एक पीड़ित ने बताया, “हम मजदूरी छोड़कर किराया लगाकर अस्पताल आते हैं, यहाँ सरकारी काम के लिए भी हमारी जेब काटी जा रही है।”
> हमारी मांग: क्षेत्र की जनता ने जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपी कर्मचारी पर तत्काल कार्रवाई की जाए, अन्यथा ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए सड़क पर उतरेंगे।


