सिवनी बरघाट
लगातार हो रहे जानलेवा हादसों और प्रशासन की गहरी नींद ने अब सिवनी-बालाघाट मार्ग को एक सुलगता हुआ मुद्दा बना दिया है। बार-बार अखबारों में खबर प्रकाशित होने और शिकायतों के अंबार के बावजूद, स्थिति जस की तस बनी हुई है। जिम्मेदार अधिकारियों की इस ‘रहस्यमयी’ चुप्पी ने अब युवाओं के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
*मुख्य बिंदु: जो व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं*
* खूनी सड़क: गड्ढों और बदहाली के कारण यह मार्ग अब आम लोगों के लिए ‘डेथ ट्रैप’ (Death Trap) साबित हो रहा है।
* प्रशासनिक अनदेखी: बार-बार संज्ञान में लाए जाने के बाद भी निर्माण कार्य को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
* जनप्रतिनिधियों पर सवाल: चुनाव के वक्त बड़े वादे करने वाले नेता आज इस गंभीर समस्या पर मौन साधे हुए हैं।
*युवाओं का शंखनाद: 23 मार्च को बरघाट में ‘महा-आंदोलन’*
सड़क की इस जर्जर हालत को लेकर गैर-राजनीतिक संगठन ‘युवा विचार मंच’ ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। अग्रौहा लॉन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंच के पदाधिकारियों ने दो-टूक शब्दों में सरकार को चेतावनी दी है।
> “सैकड़ों मासूमों की जान जाने के बाद भी अगर प्रशासन नहीं जागा, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। 23 मार्च को बरघाट की सड़कों पर जन-सैलाब उतरेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।”
> — युवा विचार मंच के पदाधिकारी
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*आगे क्या?*
सिवनी और बालाघाट जिले के जागरूक नागरिक अब एकजुट होकर जनजागरण अभियान चला रहे हैं। आगामी 23 मार्च को होने वाला यह प्रदर्शन न केवल एक विरोध है, बल्कि सोई हुई व्यवस्था को जगाने की एक अंतिम चेतावनी भी है।
देखना यह होगा कि इस जन-आक्रोश के बाद भी प्रशासन की नींद टूटती है या जनता को अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही लंबी लड़ाई लड़नी होगी।


