कोतमा,- में नदियों का कत्लेआम जारी, माइनिंग अफसरों ने कार्यालय को बनाया माफिया का ‘सेफ हाउस’ खनिज विभाग का ‘डिजिटल डाका’, कलेक्टर की साख पर धब्बा बना चर्चा का विषय सरकारी सिस्टम की ‘जलसमाधि’ अफसरों ने गिरवी रखी अपनी कलम, बिना अनुमति जारी हुए हजारों ई-टीपी ने खोली अनूपपुर प्रशासन के भ्रष्टाचार की पोल इंट्रो:- मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में करोड़ों रुपये का रेत घोटाला सामने आया है, जहां ‘एसोसिएट कॉमर्स’ और खनिज विभाग की मिलीभगत से नदियों का सीना छलनी किया जा रहा है। बारिश के मौसम की आड़ में अवैध खनन के साक्ष्यों को मिटाने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है। शिकायत के बावजूद स्थानीय प्रशासन और अधिकारी मौन साधे हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हैं। अब यह मामला वल्लभ भवन से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच चुका है और जल्द ही उच्च न्यायालय में गूंजने वाला है। अनूपपुर:- जिले की नदियों में भारी मशीनों से किए गए अवैध उत्खनन के गहरे जख्मों पर अब मानसून का पर्दा डालने की तैयारी चल रही है। खनिज विभाग के अधिकारी शिकायतों के हफ्तों महीनों बाद भी जांच के लिए मौके पर नहीं जा रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार अफसर जानबूझकर बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि नदियों का जलस्तर बढ़ने से पोकलेन मशीनों के निशान और अवैध खनन के सबूत पानी में समा जाएं। अधिकारियों की यह ‘सोची-समझी खामोशी’ सिर्फ लापरवाही नहीं है, बल्कि रेत माफियाओं को खुला संरक्षण देने का एक बड़ा अपराध है।
‘जादूई पोर्टल’ की सेंधमारी और डिजिटल लूट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) द्वारा 27 जून को अनुमति दी जाती है, लेकिन खनिज विभाग का पोर्टल 7 जून को ही ई-टीपी (E-TP) उगलना शुरू कर देता है। बिना अनुमति के 20 दिन पहले पास जारी होना कोई तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि एक सुनियोजित डकैती है। यह दर्शाता है कि विभाग के तकनीकी तंत्र पर पूरी तरह से माफियाओं का कब्जा हो चुका है। नियम-कानून ताक पर रखकर पहले ही लूट का खेल शुरू कर दिया गया, जो सरकारी पोर्टल की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
ओवरलोडिंग को ‘सरकारी कवच’, रॉयल्टी में अरबों की चपत सरकारी कागजों पर जिस डंपर की क्षमता केवल 13.49 क्यूबिक मीटर है, उसे पोर्टल के माध्यम से 29 क्यूबिक मीटर का पास जारी किया जा रहा है। यह सीधे तौर पर राजस्व की भारी चोरी और सरकारी खजाने में सेंधमारी है। भारी वाहनों से सड़कों की हालत खस्ता हो रही है और सरकार के हिस्से की रॉयल्टी भ्रष्ट अधिकारियों और रसूखदारों की तिजोरियों में भर रही हैशिकायतकर्ता द्वारा सौंपे गए फर्जी पास के पुख्ता साक्ष्य इस अरबों रुपये के घोटाले की चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं।
जब रक्षक ही बने ‘भक्षक’, तो न्याय की उम्मीद कैसे? इस पूरे मामले में सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस खनिज निरीक्षक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं जांच की कमान भी उसी के हाथों में सौंप दी गई है। यह ‘अंधेर नगरी’ का साक्षात प्रमाण है जहां आरोपी ही खुद अपना जज बन बैठा है। जिला प्रशासन ने पुख्ता साक्ष्यों की अनदेखी कर खुद को कठघरे में खड़ा कर लिया है। अधिकारियों का यह रवैया साफ बता रहा है कि वे जनता के सेवक नहीं, बल्कि रेत कंपनी के वैतनिक मुनीम की तरह काम कर रहे हैं। PMO तक पहुंची गूंज, अब उच्च न्यायालय में होगा पर्दाफाशस्थानीय प्रशासन के निकम्मेपन के बाद अब अनूपपुर की सिसकती नदियों की आवाज दिल्ली तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और केंद्रीय एजेंसियों ने इस मामले का संज्ञान ले लिया है। इसके साथ ही, शिकायतकर्ता ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की पूरी तैयारी कर ली है। यदि जिला प्रशासन ने इसी तरह माफियाओं से साठ-गांठ जारी रखी तो जल्द ही इस करोड़ों के रेत घोटाले में शामिल सफेदपोशों और खाकी-खादी के नापाक गठजोड़ को न्यायालय के सामने बेनकाब किया जाएगा।दर्जनों शिकायतों के बाद भी जिम्मेदारों ने मूंदी आंखें दर्जनों शिकायतों के बावजूद खनिज विभाग की यह धृतराष्ट्र जैसी भूमिका यह साबित करती है कि सिस्टम को भीतर तक खोखला कर दिया गया है। जब जिम्मेदार ही अपनी आंखें मूंद लें, तो अनूपपुर की नदियों का अस्तित्व और सरकारी खजाना दोनों लुटने से कोई नहीं बचा सकता। अब देखना यह है कि वल्लभ भवन और उच्च न्यायालय के डंडे के बाद इन सोए हुए अधिकारियों की आंखें खुलती हैं या नहीं।


