गाड़ी चलाने का शौक पूरा करने के लिए चुराई थीं एक्टिवा, दोनों वाहन बरामद
जबलपुर। रांझी थाना पुलिस ने वाहन चोरी के दो मामलों का खुलासा करते हुए दो विधिविवादित बालकों को पकड़ा है। दोनों बालकों ने केवल गाड़ी चलाने का शौक पूरा करने के लिए एक्टिवा चोरी करना स्वीकार किया है। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर चोरी की गई दोनों एक्टिवा बरामद कर ली हैं।
पुलिस अधीक्षक श्री सम्पत उपाध्याय के निर्देश पर जिले में वाहन चोरी, लूट, झपटमारी और नकबजनी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अपराध श्री जितेन्द्र सिंह एवं नगर पुलिस अधीक्षक रांझी श्री सतीष कुमार साहू के मार्गदर्शन में रांझी थाना पुलिस ने कार्रवाई की।
पहला मामला
थाना रांझी में बड़ा पत्थर निवासी प्रमोद गुप्ता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी पत्नी 12 मई 2026 की रात खालसा स्कूल के पास खाना बनाने के कार्य से गई थीं। लौटने पर उनकी एक्टिवा क्रमांक एमपी 20 एसएस 1609 गायब मिली। मामले में थाना रांझी में अपराध क्रमांक 352/2026 धारा 303(2) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।
दूसरा मामला
इसी तरह 13 मई 2026 को जेडीए कॉलोनी बड़ा पत्थर निवासी अमर विश्वास ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि घर के सामने खड़ी उनकी एक्टिवा क्रमांक एमपी 20 एसएफ 5703 चोरी हो गई है। इस मामले में अपराध क्रमांक 353/2026 धारा 303(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग
जांच के दौरान पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज के आधार पर पहचान कर दो 14 वर्षीय विधिविवादित बालकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में दोनों ने बताया कि उन्हें वाहन चलाने का शौक था, लेकिन घर में कोई वाहन नहीं था। इसी कारण उन्होंने पुरानी चाबी का उपयोग कर दोनों एक्टिवा का लॉक खोलकर चोरी कर ली।
बालकों ने बताया कि चोरी के बाद वे दोनों वाहनों से शहर में घूमते रहे। बाद में पेट्रोल खत्म हो जाने पर उन्होंने एक्टिवा को सुंदरवन स्थित खंडहर के पास खड़ा कर दिया।
दोनों एक्टिवा बरामद
पुलिस ने दोनों बालकों की निशानदेही पर सुंदरवन स्थित खंडहर के पास से ग्रे रंग की एक्टिवा क्रमांक एमपी 20 एसएफ 5703 और नीले रंग की एक्टिवा क्रमांक एमपी 20 एसएस 1609 बरामद कर ली।
इनकी रही सराहनीय भूमिका
वाहन चोरी के मामलों के खुलासे में थाना प्रभारी रांझी निरीक्षक उमेश कुमार गोल्हानी, प्रधान आरक्षक पुरुषोत्तम, आरक्षक चन्द्रभान, आरक्षक मनीष एवं आरक्षक अभिषेक मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


