कटनी: मध्यप्रदेश के कटनी जिले में आयोजित विशाल सत्संग कार्यक्रम में संत रामपाल जी महाराज ने एक ऐसी अद्भुत घटना का वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु स्तब्ध रह गए। सत्संग में हजारों लोगों की उपस्थिति रही, जहां कबीर परमात्मा की दिव्य शक्ति का प्रमाण प्रस्तुत किया गया।
सत्संग के दौरान संत रामपाल जी महाराज ने बताया कि कबीर परमात्मा ने इतिहास में अनेक बार अपनी सर्वोच्च सत्ता का प्रमाण दिया है। उन्होंने एक प्रसंग सुनाया, जिसमें सिकंदर लोदी के पीर शेखतकी ने कबीर जी की परीक्षा लेने का प्रयास किया।
शेखतकी की 12–13 वर्षीय बेटी की मृत्यु हो चुकी थी और उसे कब्र में दफना दिया गया था। उसने शर्त रखी कि यदि कबीर जी उसकी बेटी को जीवित कर दें, तभी वह उन्हें अल्लाह मानेगा। इस चुनौती की खबर पूरे क्षेत्र में फैला दी गई, जिससे हजारों लोग उस घटना के साक्षी बनने पहुंच गए।
कबीर परमात्मा ने पहले शेखतकी को ही अपनी शक्ति आजमाने के लिए कहा, लेकिन वह असफल रहा। इसके बाद कबीर परमात्मा ने तीन बार पुकार लगाई। पहली दो बार कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई, जिस पर शेखतकी उपहास करने लगा।
लेकिन तीसरी पुकार में जैसे ही कबीर परमात्मा ने आदेश दिया, “हे जीवात्मा! जहां भी है, कबीर हुक्म से अपने शरीर में प्रवेश कर,” उसी क्षण वह मृत बालिका जीवित होकर कब्र से बाहर आ गई। यह दृश्य देखकर पूरा जनसमूह आश्चर्यचकित रह गया। लोगों ने कहा, “कमाल कर दिया।” तब कबीर परमात्मा ने उसका नाम ‘कमाली’ रख दिया। जीवित होने के बाद उस बालिका ने स्वयं कबीर परमात्मा को पूर्ण परमेश्वर बताया और लगभग डेढ़ घंटे तक सत्संग कर लोगों को सच्चे भगवान की पहचान कराई।
संत रामपाल जी महाराज ने समझाया कि यह घटना सिद्ध करती है कि जीवन और मृत्यु पर नियंत्रण केवल पूर्ण परमेश्वर का ही होता है। वही अपने साधक की आयु बढ़ा सकता है और प्रारब्ध में परिवर्तन कर सकता है। अन्य कोई भी आयु बढ़ाने अथवा प्रारब्ध में बदलाव करने में समर्थ नहीं है।
सत्संग के समापन पर उपस्थित श्रद्धालु इस दिव्य प्रसंग से अत्यंत प्रभावित हुए तथा एकदिवसीय नामदीक्षा स्थल पर पहुंचकर संत रामपाल जी महाराज से नामदीक्षा भी प्राप्त की।


