25 मई से 2 जून तक रहने वाला नौतपा इस बार बेहद खास होने वाला है। जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में गोचर करते हैं, तो पृथ्वी पर गर्मी अपने चरम पर होती है। इस भीषण तपन के दौरान खुद को सुरक्षित रखने और कुंडली में सूर्य-चंद्रमा की स्थिति को मजबूत करने के लिए शास्त्रों और आयुर्वेद में कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। आइए इसे थोड़ा आसान भाषा में समझते हैंiरोहिणी नक्षत्र को चंद्रमा का नक्षत्र माना जाता है, जो शीतलता का प्रतीक है। जब ब्रह्मांड का सबसे गर्म ग्रह (सूर्य), शीतलता के प्रतीक (रोहिणी) के घर में आता है, तो वह उसकी ठंडक को पूरी तरह सोख लेता है।
इसके कारण पृथ्वी का तापमान अचानक बहुत बढ़ जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी, इस दौरान सूर्य की किरणें पृथ्वी के इस हिस्से (भारतीय उपमहाद्वीप) पर बिल्कुल सीधी और लंबवत (Vertical) पड़ती हैं, जिससे गर्मी अपने चरम पर होती है।नौतपा के दौरान प्यासे इंसानों और पशु-पक्षियों को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है। राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाएं या मटके का दान करें।इस समय सत्तू, आम, तरबूज, खरबूजा, दूध, दही, छाछ, और सूती कपड़ों का दान करने से सूर्य और चंद्रमा दोनों ग्रहों के दोष शांत होते हैं।रोज सुबह सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल (अर्घ्य) अर्पित करें। इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
शरीर में पानी की कमी न होने दें। पानी के साथ-साथ नींबू पानी, ओआरएस (ORS), छाछ, लस्सी, नारियल पानी और पना का सेवन करें।धूप और गर्मी से बचने के लिए ढीले, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर को हवा मिलती रहे।जब भी बहुत जरूरी होने पर बाहर निकलें, तो सिर पर टोपी या स्कार्फ बांधें और धूप का चश्मा जरूर लगाएं।नौतपा के दौरान पाचन अग्नि पहले से ही संवेदनशील होती है। ज्यादा तेल, मिर्च-मसाले, फास्ट फूड और गरिष्ठ (भारी) भोजन खाने से पेट खराब हो सकता है। अत्यधिक गर्मी के कारण खाना बहुत जल्दी खराब होता है। इन 9 दिनों में भूलकर भी बासी भोजन न खाएं, इससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है।चाय, कॉफी और शराब का सेवन कम से कम करें, क्योंकि ये शरीर को अंदर से डिहाइड्रेट (पानी की कमी) करते हैं। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब सूरज बिल्कुल सिर पर होता है, अनावश्यक रूप से घर या ऑफिस से बाहर न निकलें।
तेज धूप या गर्मी से तुरंत लौटकर फ्रिज का एकदम ठंडा पानी या बर्फ का पानी न पिएं। इससे ‘सर्द-गर्म’ हो सकता है और आप बीमार पड़ सकते हैं। पहले शरीर का तापमान सामान्य होने दें। हालांकि नौतपा में पूजा-पाठ वर्जित नहीं है, लेकिन अत्यधिक गर्मी और सूर्य के उग्र स्वभाव के कारण इन दिनों में बड़े मांगलिक कार्य या लंबी यात्राएं टालने की सलाह दी जाती है। नौतपा के दौरान अपने घर की छत या बालकनी में मिट्टी के बर्तनों में दाना-पानी जरूर रखें। बेजुबान पक्षियों को इस भीषण गर्मी में आपकी छोटी सी मदद से नया जीवन मिल सकता है। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।


