जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज (एनएससीबी), जबलपुर की महिला फैकल्टी सदस्यों ने उच्च पद की जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद संबंधित वेतन और सेवा लाभ नहीं मिलने के खिलाफ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की शरण ली है। इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता महिला फैकल्टी का कहना है कि उनसे लंबे समय से प्रोफेसर स्तर के दायित्वों और कार्यों का निर्वहन कराया जा रहा है, लेकिन उन्हें उस पद के अनुरूप वेतनमान, पदोन्नति संबंधी लाभ और अन्य सेवा सुविधाएं प्रदान नहीं की गईं। उनका तर्क है कि जब विभाग द्वारा उच्च पद का कार्य लिया जा रहा है तो नियमानुसार उस पद से जुड़े वित्तीय और सेवा संबंधी लाभ भी दिए जाने चाहिए।
याचिका में राज्य सरकार और संबंधित विभागीय अधिकारियों के निर्णय को चुनौती देते हुए कहा गया है कि यह स्थिति समान कार्य के लिए समान वेतन और सेवा अधिकारों के सिद्धांत के विपरीत है। याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय से मांग की है कि उन्हें उनके द्वारा किए जा रहे कार्य के अनुरूप वेतनमान और सेवा लाभ प्रदान किए जाएं।
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। अदालत अब सरकार का पक्ष सामने आने के बाद मामले की अगली सुनवाई करेगी।
यह मामला मेडिकल शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों और फैकल्टी सदस्यों के सेवा अधिकारों से जुड़ा होने के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें राज्य सरकार के जवाब और हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।


