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June 22, 2026
सी टाइम्स
अंतरराष्ट्रीय

जेडी वेंस ने पत्नी उषा को दिया आस्था में वापसी का श्रेय, बोले- ‘रिश्ते ने बदली मेरी सोच



वाशिंगटन, 22 जून (अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईसाई धर्म में अपनी वापसी भारतीय-अमेरिकी पत्नी उषा वेंस को इसका श्रेय दिया है। उन्होंने कहा कि अंतर-धार्मिक विवाह में पत्नी के सहयोग और प्यार, परिवार व प्रतिबद्धता के प्रति उनकी सोच पर पड़े प्रभाव ने उनकी आध्यात्मिक यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



न्यूयॉर्क टाइम्स के स्तंभकार रॉस डाउथैट के साथ बातचीत में जेडी वेंस ने कहा कि उषा के साथ उनके रिश्ते ने न सिर्फ उनकी निजी जिंदगी को बदला, बल्कि कई सालों तक नास्तिक रहने और आध्यात्मिक उलझन के बाद आस्था के प्रति उनके नजरिए को भी बदला।



वेंस ने कहा, “मुझे महसूस हुआ कि उषा से प्यार करने पर पता चला कि प्यार में असल में कुछ पवित्र होता है।” अपनी नई किताब पर चर्चा के दौरान जेडी वेंस ने यह टिप्पणी की। इस किताब में जेडी वेंस ने अपने मुश्किल बचपन, आस्था से दूर होने और आखिर में कैथोलिक धर्म अपनाने तक की यात्रा का जिक्र किया है।



वेंस ने बताया कि दादी ही उनके धार्मिक जीवन का मुख्य आधार थीं, लेकिन दादी के निधन के बाद ईसाई धर्म से उनका जुड़ाव कमजोर पड़ गया था। उन्होंने कहा, “जब मेरी दादी का निधन हुआ, तो ईसाई धर्म से मेरा जुड़ाव भी टूट गया। यह कोई संयोग नहीं है कि दादी की मौत के करीब दो साल बाद ही मैंने खुद को नास्तिक कहना शुरू कर दिया था।”



कई सालों तक वे धर्म से दूर रहे। उन्होंने खुद को शिक्षा, करियर की महत्वाकांक्षाओं और निजी उपलब्धियों में लगाए रखा। पीछे मुड़कर देखने पर उन्होंने कहा कि इन चीजों से उन्हें आखिर में कोई संतुष्टि नहीं मिली। उन्होंने कहा, “मुझे एहसास हुआ कि इस तरह की भागदौड़ ने मुझे अंदर से काफी खोखला कर दिया था।”



उन्होंने बताया कि उनकी जिंदगी में बदलाव धर्मशास्त्र की वजह से नहीं, बल्कि रिश्तों की वजह से आया। जेडी वेंस ने पत्नी उषा के बारे में विस्तार से बात की, जिनसे उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में आने से पहले शादी की थी। हालांकि उषा ईसाई धर्म को नहीं मानतीं, लेकिन वेंस ने कहा कि धर्म में लौटने के उनके फैसले में उषा का साथ एक अहम वजह बना।



उन्होंने कहा, “सच कहूं तो, अपनी आस्था में लौटने पर मुझे थोड़ा बुरा लग रहा था, क्योंकि मेरे साथ कई तरह की जरूरतें और जिम्मेदारियां भी जुड़ी हुई थीं।”



उपराष्ट्रपति ने बताया कि उनकी पत्नी ने ऐसी जिम्मेदारियां भी उठाईं, जिनकी उन्होंने कभी उम्मीद नहीं की थी। वेंस ने कहा, “मैं हर रविवार इस बारे में सोचता हूं, जब मैं अपनी 36 हफ्ते की गर्भवती पत्नी (जो खुद ईसाई नहीं हैं) और अपने तीनों बच्चों के साथ कहीं जाता हूं।”



उन्होंने आगे कहा, “उषा ने इसके लिए कभी हामी नहीं भरी थी। उन्होंने तो सोचा था कि रविवार को आराम से देर तक सोएंगी और इन सब झंझटों से दूर रहेंगी। लेकिन उषा का रवैया हमेशा सकारात्मक रहा।”



वेंस ने कहा, “वह यह सब बेहद धैर्य के साथ करती हैं। उनका न सिर्फ इसे स्वीकार करना बल्कि मेरी इस यात्रा का समर्थन करना मेरे लिए एक तरह का संकेत था कि मेरे लिए इस रास्ते पर आगे बढ़ना सही है।” वेंस ने कहा कि उषा ने शादी और रिश्तों के बारे में उनकी समझ को पूरी तरह बदल दिया।



उन्होंने कहा, “रिश्तों को लेकर हमारे समाज में यह भावना थी कि रोमांस में कुछ भी पवित्र नहीं है। मुझे लगता है कि सभी ने इसे महसूस किया होगा। जब उन्हें प्यार हुआ, तो यह सोच बदल गई। उषा ईसाई नहीं हैं, फिर भी उन्होंने पुरुष और स्त्री के मिलन के बारे में मेरी सोच को पूरी तरह बदल दिया। बिना जाने ही उन्होंने मुझे इसे एक बेहद ईसाई दृष्टिकोण से देखने में मदद की।”



वेंस ने ईसाई दोस्तों और परिवारों को भी श्रेय दिया, जिन्होंने उन्हें आस्था की ओर लौटने में मदद की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का वे सबसे अधिक सम्मान करते थे, उनमें से कई ईसाई थे और उनकी जिंदगी उन मूल्यों को दिखाती थी जिन्हें वे खुद अपनाना चाहते थे।



जेडी वेंस ने कहा कि पति और पिता बनने के बाद उन्हें जीवन के अर्थ, जिम्मेदारी और उद्देश्य जैसे गहरे सवालों का सामना करना पड़ा। इन्हीं सवालों ने उन्हें आखिरकार ईसाई धर्म की ओर वापस पहुंचाया।



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