बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी से अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुआ पहला जत्था, सेवादारों ने संभाली सेवा की कमान
वाराणसी, 28 जून (वार्ता) बाबा बर्फानी के पवित्र दर्शन के लिए अमरनाथ यात्रा पर धर्मनगरी काशी से श्रद्धालुओं का पहला जत्था रवाना हो गया। श्री काशी विश्वनाथ सेवा समिति के तत्वावधान में सेवादारों और श्रद्धालुओं का पहला दल वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से हावड़ा-अमृतसर मेल के माध्यम से कश्मीर के लिए प्रस्थान कर गया।रविवार को अमरनाथ यात्रा के शुभारंभ के अवसर पर काशी में सेवादारों और काशीवासियों द्वारा मोटरसाइकिल यात्रा भी निकाली गई। श्री काशी विश्वनाथ सेवा समिति पिछले 26 वर्षों से अमरनाथ यात्रियों की सेवा में जुटी हुई है। समिति द्वारा चंदनबाड़ी में विशाल भंडारे का संचालन किया जाता है। श्रद्धालुओं को विशेष रूप से बनारसी व्यंजनों में कचौड़ी, सब्जी, जलेबी, ठंडाई के साथ-साथ दक्षिण भारतीय व्यंजन भी परोसे जाते हैं।समिति की ओर से यात्रा के दौरान लगभग 300 श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जाती है। इस वर्ष भी समिति द्वारा बड़ी संख्या में यात्रियों को बाबा बर्फानी के दर्शन कराने में सहयोग प्रदान किया जा रहा है।समिति के सेवादार दिलीप सिंह ‘बंटी’ ने बताया कि 80 से 90 सेवादारों का दल यात्रा पर जा रहा है। इनमें 10 सेवादारों का एक समूह विवेक श्रीवास्तव और कुलदीप त्यागी के नेतृत्व में पंजाब जाएगा। वहां से दो ट्रकों में राशन सामग्री लेकर चंदनबाड़ी पहुंचेंगे, जबकि बाकी सेवादार हावड़ा-अमृतसर मेल और बेगमपुरा एक्सप्रेस से सीधे जम्मू होते हुए चंदनबाड़ी पहुंचकर सेवा कार्यों में जुटेंगे।उन्होंने बताया कि अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए समिति पूरी तरह तैयार है। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए भोजन, आवास और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
मोदी की सुरक्षित जीवन के लिए बीमा योजनाओं से जुड़ने की अपील
नयी दिल्ली, 28 जून (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से अधिक से अधिक संख्या में जुड़ने की अपील करते हुए कहा है कि छोटी सी राशि से भी परिवार को बड़ी सुरक्षा मिल सकती है और ये योजनाएं लाखों परिवारों को कठिन समय में आर्थिक संबल प्रदान किया है।श्री मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 135वीं कड़ी में कहा कि हमारे देश में जन्मदिन और शादी-ब्याह जैसे पारिवारिक कार्यक्रम केवल परिवार तक सीमित नहीं होते, बल्कि पूरे समाज का भी उत्सव होते हैं।प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के बहादुरपुरा गांव के पेठकर परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने (पेठकर परिवार) अपने घर में विवाह के अवसर पर गांव के लगभग साढ़े तीन हजार लोगों के लिए एक-एक लाख रुपये के दुर्घटना बीमा की व्यवस्था कर समाज में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि इस पहल के पीछे जरूरतमंद परिवारों को कठिन समय में आर्थिक सहारा देने की भावना है।प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार भी प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के माध्यम से करोड़ों परिवारों तक सुरक्षा का कवच पहुंचा रही है। उन्होंने बताया कि मात्र 20 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर दो लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा मिलता है। अब तक 58 करोड़ से अधिक लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं, जिनमें करीब 28 करोड़ महिलाएं हैं। योजना के तहत अब तक पीड़ित परिवारों को 3,700 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसके तहत 436 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके परिवार को दो लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है। अब तक 27 करोड़ से अधिक लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं तथा करीब 11 लाख परिवारों को लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की सहायता मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों के पीछे लाखों परिवारों के जीवन की सच्ची कहानियां हैं। कहीं किसी मां को बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में मदद मिली तो कहीं किसी परिवार को कठिन समय में आर्थिक सहारा मिला।
जनभागीदारी राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत : मोदी
नयी दिल्ली, 28 जून (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनभागीदारी को किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा है कि जब देशवासी किसी संकल्प के साथ आगे बढ़ते हैं तो कोई भी शक्ति उन्हें अपने लक्ष्य से डिगा नहीं सकती।प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के दौरान अपनी अपीलों पर देशवासियों की सक्रिय भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों ने जिस तरह सहयोग किया, वह राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी की शक्ति का सशक्त उदाहरण है।श्री मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वीं कड़ी में कहा कि राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी भारत कीसबसे बड़ी पूंजी है और इसका अनुभव देश बार-बार कर रहा है।उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में बनी युद्ध जैसी परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने देशवासियों से कुछ समय के लिए सोना खरीदने से बचने, विदेश में छुट्टियां मनाने को टालने, कार पूलिंग को बढ़ावा देने तथा किसानों से रासायनिक उर्वरकों के बजाय प्राकृतिक खाद के अधिक उपयोग का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि देशवासियों ने उनकी अपील का न केवल समर्थन किया, बल्कि उसे व्यवहार में भी उतारा। अनेक परिवारों ने संदेश भेजकर बताया कि वे विवाह समारोह में नया सोना नहीं खरीदेंगे और आवश्यकता पड़ने पर पुराने आभूषणों को पुनर्चक्रित कर उपयोग करेंगे। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर विदेश यात्राएं स्थगित करने की जानकारी भी साझा की।प्रधानमंत्री ने कहा कि कार पूलिंग को लेकर भी लोगों ने अपने अनुभव साझा किए हैं। जो लोग पहले अलग-अलग वाहनों से एक ही दिशा में जाते थे, वे अब साथ यात्रा कर रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग बस और मेट्रो का उपयोग कर रहे हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल की बचत हो रही है।
दुनिया के अलग–अलग हिस्सों तक पहुँच रही भारतीय संस्कृति : मोदी
नयी दिल्ली 28 जून (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आज भारतीय संस्कृति दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँच रही है और हमारे गीत, संगीत और आध्यात्म को दुनिया-भर के लोग जान रहे हैं और अपना रहे हैं।श्री मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात की 135वीं कड़ी में रविवार को कहा कि आज भारतीय संस्कृति दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँच रही है। हमारे गीत, संगीत और आध्यात्म को दुनिया-भर के लोग जान रहे हैं और अपना रहे हैं। भारत से हजारों किलोमीटर दूर कैरिबियन सागर में डोमेनिक रिपब्लिक नाम का एक देश है। वहाँ भारतीयों की संख्या करीब 100 है शायद इससे भी कम होगी। इसके बावजूद भारतीय संस्कृति और आध्यात्म से जुड़ा एक बहुत अच्छा प्रयास वहाँ हो रहा है। वहाँ स्पेनिश बोलने वाले कुछ लोगों ने एक टीम बनाई है। इस टीम का नाम है, ‘ब्रहमकमल डोमिनिकाना’। टीम के सदस्य मिलकर वैदिक साहित्य का अध्ययन करते हैं। वे वैदिक मंत्रों का उच्चारण भी सीख रहे हैं। उन्हें इसकी कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं मिली है। लेकिन उन्होंने आडियो रिकार्डिंग्स सुनकर वैदिक मंत्रों का सही उच्चारण सीखा है। आज वे कई मंत्रों का बहुत अच्छे से जाप कर लेते हैं। इनमें पुरुष सूक्तम, श्री सूक्तम, श्री रुद्रम, दुर्गा सूक्तम और देवी महात्मयम शामिल हैं।उन्होंने कहा कि भारत से इतनी दूर रहकर हमारी परंपराओं को सीखने का उनका यह प्रयास बहुत प्रेरक है। मैं ‘ब्रहमकमल डोमिनिकाना’ वहाँ के सभी सदस्यों को उनके प्रयासों के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ। मैं ऐसे सभी लोगों की हृदय से सराहना करता हूँ जो भारतीय संस्कृति को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ की प्राचीन परंपरा को फिर से जीवंत किया : मोदीनयी दिल्ली 28 जून (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि हजारों साल पुरानी हमारी नालंदा विश्वविद्यालय अब नए अवतार के रूप में देश का भाग्य गढ़ने के साथ ही शास्त्रार्थ की हमारी प्राचीन परंपरा को फिर से जीवंत किया है।श्री मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात की 135वीं कड़ी में रविवार को कहा कि यह तकनीक का युग है। हर दिन नये शोध हो रहे है। नए-नए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की खोज सामने आ रहे हैं। इस दौर में एक सवाल बहुत महत्वपूर्ण है कि लोगों की रचनात्मकता को कैसे बचाए रखा जाए? नई तकनीक के साथ आगे बढ़ते हुए हम अपनी जड़ों से कैसे जुड़े रहें? इन सवालों का समाधान खोजा है ‘नालंदा विश्वविद्यालय’ ने। हजारों साल पुरानी हमारी नालंदा विश्वविद्यालय अब नए अवतार के रूप में भारत का भाग्य गढ़ रही है। दो साल पहले मुझे नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर के लोकार्पण का अवसर मिला था। नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ की हमारी प्राचीन परंपरा को फिर से जीवंत किया है। शास्त्रार्थ केवल अपनी बात रखने का माध्यम नहीं है। ये वाद–संवाद और मंथन की एक अनुशासित प्रक्रिया है। इसमें तर्क के साथ, तथ्य के साथ, अपनी बात कहना बहुत जरूरी होता है, और उसमें आपकी महारत होनी चाहिए। दूसरों के विचारों को धैर्य से सुनने और समझने की सीख भी इस शास्त्रार्थ की प्रक्रिया से मिलती है।
उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि नालंदा विश्वविद्यालय ने इसे अपने दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनाया। इसमें भाग लेने वाले करीब आधे छात्र अन्य देशों से आए थे। एक प्राचीन परंपरा को आज के समय से जोड़ने का ये प्रयास बहुत सराहनीय है। मैं इसके लिए नालंदा विश्वविद्यालय को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। मैं देश के दूसरे विश्वविद्यालयों से भी आग्रह करूंगा कि वे ऐसी पहल पर विचार करें।श्री मोदी ने कहा कि जड़ों से जुड़े रहकर युवाओं को नई तकनीक के लिए तैयार करने का एक और अच्छा प्रयास हो रहा है। दिल्ली में स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, एआई और डाटा साइंस में बीटेक प्रोग्राम शुरू करने जा रही है। ये आधुनिक तकनीक को भारत के पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे भारतीय भाषाओं के लिए नए एआई टूल्स तैयार करने में मदद मिलेगी। हमारे प्राचीन ग्रंथों और पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित करने के काम को भी नई गति मिलेगी।
दशकों में तैयार होते हैं मेघालय के रूट ब्रिज : मोदी
नयी दिल्ली 28 जून (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि मेघालय के रूट ब्रिज एक जीवित ब्रिज है जिसे तैयार होने में कई दशक लगते हैं।श्री मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात की 135वीं कड़ी में रविवार को कहा कि मेघालय की पहचान बादलों से है, खूबसूरत नजारों से है। जो मेघालय जाता है, उसे वहां के लोगों का अपनापन भी लंबे समय तक याद रहता है लेकिन, मेघालय की एक और विशेषता है। यह है मेघालय के रूट ब्रिज। इन रूट ब्रिजों की कहानी बहुत रोचक है। ये ब्रिज कुछ दिनों या कुछ वर्षों में नहीं बनते। इन्हें तैयार होने में कई दशक लगते हैं। रबर के पेड़ों की जड़ों को धीरे-धीरे दिशा दी जाती है। इन जड़ों को जल-धाराओं के पार ले जाया जाता है। समय के साथ वही जड़ें एक मजबूत ब्रिज का रूप ले लेती हैं। इन ब्रिजों की एक और विशेषता है। ये जीवित ब्रिज हैं। समय बीतने के साथ ये और मजबूत हो जाते हैं। इनमें मेघालय के लोगों की सृजनशीलता दिखाई देती है।उन्होंने कहा कि इनके पीछे वर्षों का धैर्य और प्रकृति के प्रति गहरा सम्मान है। ये ब्रिज बताते हैं कि मनुष्य प्रकृति के साथ मिलकर कितनी अद्भुत चीजें बना सकता है। ये हमारे देश की, इस धरती की धरोहर है। अब भारत ने मेघालय के रूट ब्रिजों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट नेटवर्क में शामिल कराने के लिए आवेदन किया है।प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण इन रूट ब्रिजों के सामने कई चुनौतियां भी आती हैं। ऐसे समय में मेघालय के लोगों ने इस प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई है। पहले ये पता लगाना भी आसान नहीं था कि ऐसे ब्रिजों की संख्या कितनी है? स्थानीय लोगों ने खुद इनकी गिनती शुरू की। इसके बाद समुदायों ने इन ब्रिजों की देख-भाल की जिम्मेदारी भी संभाली। आज स्थानीय लोग 120 से अधिक रूट ब्रिजों की देख-रेख कर रहे हैं।
समुद्र से आसमान तक भारत बन रहा है आत्मनिर्भर : मोदी
नयी दिल्ली, 28 जून (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत समुद्र से लेकर आसमान तक रक्षा क्षेत्र में तेजी से अधिक सुरक्षित तथा आत्मनिर्भर बन रहा है और स्वदेशी तकनीक तथा विनिर्माण के दम पर देश नयी उपलब्धियां हासिल कर रहा है।श्री मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135 वीं कड़ी में कहा कि 2026 का आधा हिस्सा बीतने को है और इन छह महीनों में देश ने सुरक्षा तथा आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में कई ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन पर हर देशवासी को गर्व है।उन्होंने कहा कि हाल ही में कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय नौसेना के बेड़े में आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय को शामिल किया गया। इन युद्धपोतों का डिजाइन और निर्माण पूरी तरह स्वदेशी है।श्री मोदी ने कहा कि जून में ही विमानन क्षेत्र में भी बड़ी सफलता मिली है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत निर्मित सी-295 विमान ने अपनी पहली उड़ान पूरी की है और ऐसे 40 विमान भारत में ही बनाए जा रहे हैं। इससे एमएसएमई और एयरोस्पेस क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प और सशक्त होगा। उन्होंने कहा कि इसी महीने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने स्वदेशी लंबी दूरी की भूमि-आक्रमण क्रूज मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया है। यह मिसाइल रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन की प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योगों की साझेदारी से विकसित की गई है।प्रधानमंत्री ने कहा कि इन उपलब्धियों से स्पष्ट है कि आज भारत समुद्र से लेकर आकाश तक अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन रहा है।
मोदी ने मिट्टी से बनी गणपति बप्पा की मूर्ति खरीदने की अपील की
नयी दिल्ली 28 जून (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि आप यह प्रयास करें कि आपके घर, सोसायटी या आसपास की जगहों पर गणपति बप्पा की जो मूर्ति स्थापित हो वह हमारे देश की मिट्टी से बनी हो, वो हमारे अपने कुम्हारों और स्थानीय कलाकारों के हाथों तैयार हुई हो।श्री मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात में रविवार को कहा कि मुझे कई लोगों ने पत्र लिखकर एक खास विषय पर बात करने का सुझाव भेजा है। ये विषय ‘गणेश उत्सव’ से जुड़ा है। वैसे तो ‘गणेश उत्सव’ में अभी काफी समय बाकी है लेकिन लोगों ने ये आग्रह किया है कि इस विषय पर अभी ही बात होनी चाहिए। दरअसल, गणेश जी की मूर्तियां बनाने का काम बहुत पहले शुरू हो जाता है। मूर्ति बनाने वाले, मूर्तियों के व्यापार से जुड़े लोग अभी से सक्रिय हो जाते हैं। इसलिए मेरा आप सभी से एक आग्रह है। आप प्रयास करें कि आपके घर, सोसायटी या आसपास की जगहों पर गणपति बप्पा की जो मूर्ति स्थापित हो, वो हमारे देश की मिट्टी से बनी हो, वो हमारे अपने कुम्हारों और स्थानीय कलाकारों के हाथों तैयार हुई हो।उन्होंने कहा कि जो लोग गणेश जी की मूर्तियां बनाते हैं, उनसे भी मेरा आग्रह है कि वे मिट्टी की मूर्तियों को प्राथमिकता दें, और जो लोग मूर्तियां खरीदते हैं, वे भी यह जरूर देखें, कि, गणपति बप्पा की मूर्ति किससे बनी है और किस देश में तैयार हुई है। प्लास्टर आफ पेरिस से बनी मूर्तियां बिल्कुल ना खरीदें।प्रधानमंत्री ने कहा कि मिट्टी की मूर्तियां पूजा के बाद सहज रूप से पानी में विलीन हो जाती हैं। इससे हमारी नदियां, तालाबों और पर्यावरण की रक्षा होती है।
विश्व योगासन चैम्पियनशिप में भारत की जोरदार सफलता पर गर्व : मोदी
नयी दिल्ली, 28 जून (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि कुछ दिन पहले इसी माह आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पूरी दुनिया भारत के योग अभियान से जुड़ी और धरती के विभिन्न हिस्सों में ढाई हजार से ज्यादा स्थानों पर योग से सम्बंधित विविध कार्यक्रम आयोजित किए गये।श्री मोदी ने आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वीं कड़ी में रविवार को कहा कि इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर विश्व के 2,500 से अधिक स्थानों पर विविध योग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जबकि भारत में करोड़ों लोगों ने विभिन्न स्थानों पर प्रधानमंत्री ने योगाभ्यास में भाग लिया।प्रधानमंत्री ने कहा कि इस अवसर पर आयोजित विश्व योगासन चैम्पियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन किया जिससे देश का गौरव बढ़ा है।उन्होंने कहा कि इस मौके पर अहमदाबाद में आयोजित विश्व योगासन चैम्पियनशिप भी चर्चा का विषय रही, जिसमें भारत ने 114 पदक जीते। इनमें 102 स्वर्ण पदक शामिल हैं और भारत पदक तालिका में पहले स्थान पर रहा। श्री मोदी ने सभी विजेता खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि देश के लिए गर्व का विषय है।
पहले की तुलना में अब अधिक युवा खेलों को करियर के रूप में अपना रहे : मोदी
नयी दिल्ली 28 जून (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पहले की तुलना में अब कहीं अधिक युवा खेलों को करियर के रूप में अपना रहे हैं।श्री मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात की 135वीं कड़ी में रविवार को कहा, “मैं अक्सर कहता हूँ, जो खेलता है, वो खिलता है। आज देश में ऐसे युवाओं की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है, जो खेल भी रहे हैं और खिल भी रहे हैं। पहले की तुलना में अब कहीं अधिक युवा खेलों को करियर के रूप में अपना रहे हैं। मुझे नागालैंड के दो ऐसे प्रयासों के बारे में जानकारी मिली है, जो बहुत दिलचस्प हैं। पहला प्रयास है ‘नागालैंड बेबी लीग’. नाम सुनकर आपको जरूर लगता होगा ये बहुत छोटे बच्चों की कोई साधारण लीग होगी लेकिन ऐसा नहीं है। ये पांच से 10-12 साल की आयु के छोटे-छोटे बच्चे, फूल जैसे बच्चों की एक असाधारण लीग है और इन बच्चों के फुटबाल खिलाड़ियों की एक ऐसी लीग है, जो उनकी रफ्तार को और प्रतिभा के लिए उनको प्रेरित भी करती है और उनकी पहचान भी बनाती है। इसकी शुरुआत नागालैंड के अधिक-से-अधिक बच्चों को फुटबाल से जोड़ने के लिए हुई थी। पांच से बारह वर्ष तक के लड़के और लड़कियां इसमें हिस्सा ले सकते हैं। ये लीग अब अपने तीन वर्ष पूरे कर चुकी है। इस लीग का बच्चों के मन पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ा है।”उन्होंने कहा कि नागालैंड में एक और अच्छा प्रयास हो रहा है। इसका नाम है, ‘नागालैंड वुमेन फुटसाल लीग’, हो सकता है आपके लिए ये ‘फुटसाल’ एक नया नाम होगा, मैं आपको बताता हूँ फुटसाल को इनडोर फुटबाल भी कहा जाता है। इसमें एक टीम में केवल पांच खिलाड़ी होते हैं। खेल का मैदान भी फुटबाल के मैदान से बहुत छोटा होता है। इस कारण खिलाड़ियों को तेज फैसले लेने होते हैं।


