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July 4, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

राऊज एवेन्यू कोर्ट में सोनिया गांधी से जुड़े वोटर लिस्ट विवाद पर 25 जुलाई को होगी अंतिम सुनवाई

नई दिल्ली, 4 जुलाई । बिना भारतीय नागरिकता हासिल किए कथित तौर पर मतदाता सूची में जालसाजी कर नाम दर्ज कराने के मामले में कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य सोनिया गांधी के खिलाफ दाखिल पुनरीक्षण (रिवीजन) याचिका पर राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई टल गई है। अब इस मामले में 25 जुलाई को अंतिम सुनवाई होगी।

सुनवाई के दौरान सोनिया गांधी की ओर से उनके वकील ने अदालत में अपनी लिखित दलीलें दाखिल कीं। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपनी-अपनी लिखित दलीलें प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
वकील विकास त्रिपाठी की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता हासिल की थी, जबकि उनका नाम वर्ष 1980 की मतदाता सूची में दर्ज था। याचिका में सवाल उठाया गया है कि नई दिल्ली की वर्ष 1980 की मतदाता सूची में उनका नाम किस आधार पर शामिल किया गया। इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि वर्ष 1982 में उनका नाम मतदाता सूची से क्यों हटाया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी प्रश्न उठाया है कि यदि उन्होंने 1983 में नागरिकता प्राप्त की थी, तो 1980 में मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे और क्या इसके लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।

बता दें कि 9 दिसंबर, 2025 को पारित एक आदेश में राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) विशाल गोगने ने पुनरीक्षण याचिका की जांच करने पर सहमति व्यक्त की और सोनिया गांधी के साथ-साथ दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली शिकायत को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि न्यायपालिका ऐसी जांच शुरू नहीं कर सकती, जिससे संवैधानिक अधिकारियों को स्पष्ट रूप से सौंपे गए क्षेत्रों में अनुचित अतिक्रमण हो।

अदालत ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत इस तरह का हस्तक्षेप वर्जित है, जो चुनाव याचिकाओं के अलावा चुनावी मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप को सीमित करता है। वहीं, पुनरीक्षण याचिका का विरोध करते हुए सोनिया गांधी ने अदालत से कहा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित, निराधार तथा गलत एवं भ्रामक तथ्यों पर आधारित हैं।
अपने जवाब में सोनिया गांधी ने कहा कि नागरिकता से संबंधित प्रश्न पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जबकि मतदाता सूचियों से संबंधित विवाद भारत के चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि जालसाजी या धोखाधड़ी के आरोपों को साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया गया है और उन्होंने कार्यवाही को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया है।



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