, कौशल विकास, महिला उद्यमशीलता और बाजार विस्तार पर दिया गया विशेष जोर
अनूपपुर,। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने, स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करने तथा उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, स्टार्टअप्स और इच्छुक उद्यमियों को शासन की विभिन्न योजनाओं, वित्तीय सेवाओं, गुणवत्ता प्रमाणन और बाजार अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से अनूपपुर में आयोजित दो दिवसीय आरएएमपी कम्पोजिट एमएसएमई(MSME) वर्कशॉप एवं कैम्प का प्रथम दिवस सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
कार्यशाला का आयोजन भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की विश्व बैंक समर्थित रेज़िंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (RAMP) आरएएमपी योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में आरएएमपी योजना की राज्य नोडल एजेंसी मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र तथा संबंधित सहयोगी संस्थाओं के समन्वय से यह कार्यशाला आयोजित की जा रही है।
कार्यक्रम में कलेक्टर हर्षल पंचौली, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रीति रमेश सिंह, लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल, जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक राममूर्ति खरे एवं प्रबंधक सुश्री प्रियंका सोनी, एनआरएलएम के जिला परियोजना प्रबंधक शशांक प्रताप सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, एमएसएमई (MSME )उद्यमी, स्टार्टअप्स एवं इच्छुक उद्यमी उपस्थित रहे।
कलेक्टर हर्षल पंचौली ने अपने संबोधन में कहा कि अनूपपुर जिले में स्थानीय स्तर पर रोजगार, उद्यमिता और कौशल विकास की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने थर्मल पावर एवं उससे जुड़े अवसरों के दृष्टिगत उद्यमियों, युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को एक्सपोज़र विजिट के माध्यम से व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने उद्यमियों से उद्योग विभाग से निरंतर जुड़े रहने, बदलते औद्योगिक माहौल के अनुरूप अपने कौशल और व्यावसायिक कार्यप्रणाली को विकसित करने तथा स्थानीय बाजार को व्यापक बाजारों से जोड़ने की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया।
कलेक्टर हर्षल पंचौली ने स्थानीय स्तर पर तकनीकी एवं कौशल आधारित क्षमता को मजबूत करने पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आईटीआई, कॉलेजों तथा अन्य प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से युवाओं और संभावित उद्यमियों को बेहतर प्रशिक्षण एवं उद्योगोन्मुखी कौशल से जोड़ा जाए, ताकि आने वाले समय में बड़ी औद्योगिक इकाइयों और उनसे जुड़ी सप्लाई चेन में स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ सकें। उन्होंने कच्चे माल की उपलब्धता, आवश्यक अनुमतियों तथा एनओसी जैसी प्रक्रियाओं को समय पर पूर्ण करने के लिए विभागों एवं उद्यमियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया।
जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रीति रमेश सिंह ने विश्व बैंक समर्थित आरएएमपी योजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, एमएसएमई(MSME) उद्यमियों तथा नव उद्यमियों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में एमएसएमई(MSME) क्षेत्र रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान कर रहा है। उन्होंने प्रतिभागियों से कार्यशाला में दी जा रही जानकारी का लाभ लेकर अपने उद्यमों को बाजार से जोड़ने तथा स्वयं एवं देश की प्रगति में योगदान देने का आग्रह किया।
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल ने कहा कि अनूपपुर जैसे आदिवासी बहुल जिले में एमएसएमई (MSME) तथा महिला उद्यमशीलता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं मुख्य रूप से घरेलू कार्यों तक सीमित रहती थीं, लेकिन आज स्वयं सहायता समूहों और उद्यमिता के माध्यम से वे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ जिले एवं राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने शासन की योजनाओं को अधिक से अधिक उद्यमियों और समूहों तक पहुँचाने तथा स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भर रोजगार के अवसर विकसित करने पर जोर दिया।
कार्यशाला के प्रथम दिवस में प्रतिभागियों को रैंप योजना, जेड प्रमाणन, बौद्धिक संपदा अधिकार, GI, वित्तीय जागरूकता, एस एच जी (SHG) फॉर्मेलिजेशन , उद्यम पंजीकरण, जेड सर्टिफिकेशन तथा ओएनडीसी (ONDC) रजिस्ट्रेशन से संबंधित प्रक्रियाओं एवं एमएसएमई (MSME)के लिए उपलब्ध बीमा सुविधाओं सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
आरएएमपी (RAMP) योजना के अंतर्गत उपलब्ध सहायता, संस्थागत सहयोग, क्षमता निर्माण तथा एमएसएमई(MSME) की प्रतिस्पर्धात्मकता (कम्पटीशवेनेस ) से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रतिभागियों को प्रदान की गई। राजीव दलेला ने ज़ेड सर्टिफिकेशन के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए पंजीकरण प्रक्रिया, गुणवत्ता सुधार, मूल्यांकन (असेसमेंट ) की आवश्यकताओं, प्रोत्साहन (इंसेंटिव्स ) तथा इसके व्यावसायिक लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ज़ेड सर्टिफिकेशन के माध्यम से एमएसएमई (MSME) इकाइयाँ अपने उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार कर सकती हैं, उत्पादन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बना सकती हैं तथा बड़े बाजारों में अपनी विश्वसनीयता बढ़ा सकती हैं।
डॉ. अजय कुमार चौबे ने बौद्धिक संपदा अधिकार इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स एवं जीआई (GI )जियोग्राफिकल इंडिकेशन विषय पर प्रतिभागियों को जानकारी दी। उन्होंने पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट,जीआई (GI) संरक्षण एवं पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाते हुए कहा कि उत्पाद, ब्रांड और नवाचार की सुरक्षा उद्यमों के दीर्घकालिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उद्यमियों तथा स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों की पहचान, गुणवत्ता एवं बाजार पहुँच को मजबूत करने के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों की जानकारी का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
वित्तीय जागरूकता सत्र में बैंकिंग सेवाओं, ऋण सहायता क्रेडिट सपोर्ट, कार्यशील पूंजी वर्किंग कैपिटल विभिन्न शासकीय योजनाओं तथा आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में जानकारी साझा की गई। सुनील यदुवंशी ने स्वयं सहायता समूहों के फॉर्मेलिजेशन , उद्यम पंजीकरण, बाजार से जुड़ाव तथा समूह आधारित उद्यमिता के अवसरों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
इफको-टोकियो से रोमेश जैन ने एमएसएमई (MSME) उद्यमियों के लिए उपलब्ध बीमा सुविधाओं, जोखिम सुरक्षा रिस्क कवरेज तथा उद्यमों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी प्रदान की। साथ ही प्रतिभागियों को उद्यम पंजीकरण, जेड सर्टिफिकेशन तथा ओएनडीसी (ONDC) Registration से संबंधित योजनाओं, प्रक्रियाओं एवं आवश्यक दस्तावेजों के बारे में भी जानकारी दी गई, ताकि उद्यमी इन सेवाओं का व्यावहारिक लाभ प्राप्त कर सकें।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से संवाद कर उद्यम पंजीकरण, जेड सर्टिफिकेशन , वित्तीय सहायता, बीमा, एसएचजी फार्मेलाइज़शन (SHG Formalization), बाजार विस्तार तथा व्यवसाय संचालन से संबंधित अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं,एमएसएमई(MSME )उद्यमियों, स्टार्टअप्स तथा इच्छुक उद्यमियों की सक्रिय सहभागिता रही।
कार्यशाला के दूसरे दिन भी रैंप योजना, गुणवत्ता सुधार, डिजिटल मार्केट एक्सेस, शासकीय खरीद, वित्तीय सेवाओं, प्रमाणन (सर्टिफिकेशन ) तथा उद्यम विकास से जुड़े विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। आयोजकों ने जिले के उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, स्टार्टअप्स तथा इच्छुक उद्यमियों से दूसरे दिन भी अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता कर शासन की योजनाओं एवं उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया।


