परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का लगाया आरोप, डीन बोले—सीसीटीवी फुटेज और पूरे घटनाक्रम की हो रही जांचजबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। मंडला जिले के एक परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर नवजात के शव के साथ अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि उनकी बहू को प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां ऑपरेशन के बाद बच्चे का जन्म हुआ। आरोप है कि अस्पताल ने उन्हें बच्चे की स्थिति और लिंग की जानकारी नहीं दी तथा बाद में नवजात का शव वार्ड के पास रखे डस्टबिन में मिलने से परिवार स्तब्ध रह गया।
परिजनों के अनुसार, वे कई दिनों तक बच्चे के बारे में जानकारी मांगते रहे, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि प्रसूता की स्थिति गंभीर थी और गर्भ में पानी भर जाने के कारण सिजेरियन ऑपरेशन करना पड़ा। अस्पताल के अनुसार, बच्चा मृत अवस्था में पैदा हुआ था। हालांकि, नवजात का शव डस्टबिन तक कैसे पहुंचा, इसकी जांच की जा रही है।
मेडिकल कॉलेज के डीन प्रो. डॉ. नवनीत सक्सेना ने बताया कि मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई है। घटना की सच्चाई सामने लाने के लिए अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और संबंधित कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है।
इस मामले में एक और विवाद सामने आया है। अस्पताल के रिकॉर्ड में प्रसूता की उम्र नाबालिग दर्ज है, जबकि परिजनों का दावा है कि उसकी उम्र 20 वर्ष है और इसके प्रमाण भी अस्पताल को उपलब्ध कराए गए थे। इस विरोधाभास ने जांच को और जटिल बना दिया है।
फिलहाल पुलिस और अस्पताल प्रशासन सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नवजात के शव के डस्टबिन में मिलने की परिस्थितियां क्या थीं और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है।


