जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) में 13 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। 21 जून को कुलसचिव कार्यालय द्वारा जारी नियमितीकरण आदेश पर कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा ने 14 जुलाई को अमल पर अस्थायी रोक लगा दी है। इसके साथ ही संभावित कानूनी चुनौती को देखते हुए विश्वविद्यालय की ओर से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में केवियट भी दायर कर दी गई है, ताकि प्रभावित कर्मचारियों की ओर से याचिका दायर होने की स्थिति में विश्वविद्यालय का पक्ष सुने बिना कोई एकतरफा आदेश पारित न हो।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016 में मध्यप्रदेश शासन ने निर्देश जारी किए थे कि पारंपरिक विश्वविद्यालयों में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को पात्रता के आधार पर नियमित किया जाए। इसी क्रम में RDVV प्रशासन ने एक समिति गठित की, जिसने पात्र कर्मचारियों की सूची तैयार कर अपनी अनुशंसा कार्य परिषद को भेजी।
कार्य परिषद ने कुलगुरु की अध्यक्षता में हुई बैठक में शासन की मंशा के अनुरूप नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। इसके बाद कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल ने 21 जून को 13 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के नियमितीकरण के आदेश जारी किए। आदेश के बाद कर्मचारियों की सर्विस बुक अपडेट कर उन्हें नया वेतनमान देने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी।
इसी बीच विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के एक वर्ग ने इस निर्णय पर आपत्ति जताई, जिसके बाद विवाद गहरा गया। अब कुलगुरु द्वारा आदेश पर रोक लगाए जाने से मामला और संवेदनशील हो गया है। कर्मचारी संगठनों की भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में यह विवाद कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर और आगे बढ़ सकता है।


