संग्रहाध्यक्ष डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार ने किया 18/7/26 को भी सघन अवलोकन. परसवाड़ा/बालाघाट जिले के विधान सभा क्षेत्रों में पुरातात्विक महत्व के अवशेषों की अधिकता जरुर हैं किन्तु वास्तविक रूप से रखरखाव नहीं होने की श्रृंखला में ध्वस्त होते जा रहे है। इसी परिदृश्य में गत दिनांक 18 जुलाई 2026 को आकस्मिक निरीक्षण डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार संग्रहाध्यक्ष, इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट ने विधान सभा क्षेत्र परसवाड़ा के ग्राम पंचायत झिरिया,ठेमा,कोरजा की सीमा के विरान जंगल में लगभग 10 से 12 वीं शं. के ऐतिहासिक पुरातात्विक महत्व का शिव मंदिर का अवलोकन कर देखते ही आश्चर्य चकित रह गए, क्योंकि विगत वर्ष 2011 में समीर सिंह गहरवार के नेतृत्व में अवलोकन किया जा चुका था, इसी क्रम में उप संचालक, पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय जबलपुर ने निरीक्षण किया था। इस 15 वर्षों में शिव मंदिर पूर्णतः क्षतिग्रस्त होते हुए, 100 मीटर परिसर क्षेत्र में अवशेष यत्र-तत्र भग्नावशेष पड़े हुए है। शिव मंदिर के गर्भगृह में शिव उपासक प्रतिमा, स्थानक चतुर्भुज देवी प्रतिमा, खुले मैदान में दो उमा- महेश्वर, शिव लिंग-जलहरी सदृश रचना। शिव मंदिर के प्रवेशद्वार की गणेश शिला नीचे गिरी पड़ी है। डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार ने दुखांत व्यक्त कर कहा, अगर समय रहते व्यवस्थित नहीं किया गया तो पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो जायेगा। यहाँ कोई शिव मंदिर था, इतिहास के पन्नों में अंकित रह जायेगा।
शिव मंदिर परिसर क्षेत्र की खुदाई करवाकर संरक्षित किया जाता है, तो धनसुआ के गोंसाई मंदिर की तरह व्यवस्थित हो सकता है।
शिव मंदिर के पास गराड़ी बांध, 4 बरसाती नाले, सतकथा मिश्रित वनों से घिरा हुआ होने के परिप्रेक्ष्य में दुर्गम मार्ग है।
इस अवलोकन के समय परसवाड़ा विकास खंड के चारुदत्त शेण्डे, ईरफान कुरैशी, गणेश नेती, प्रतीक नगपुरे आदि थे। इनके साथ ही तीन ग्राम पंचायत झिरिया,ठेमा,कोरजा के सरपंचों से सम्पर्क किया गया तो अपने घरों पर नहीं मिले।


