नियमों के पालन और ऑनलाइन प्रविष्टियों पर दिया गया जोर
जबलपुर। जिले में कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम, पीसीपीएनडीटी अधिनियम-1994 के प्रभावी क्रियान्वयन और निजी स्वास्थ्य संस्थानों में विधिक प्रावधानों के पालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा होटल कलचुरी में अभिमुखीकरण एवं समीक्षा कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें रेडियोलॉजिस्ट, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, निजी अस्पतालों व नर्सिंग होम संचालकों, शासकीय चिकित्सकों तथा संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. प्राची सक्सेना, डॉ. नीता पाराशर, डॉ. अलका अग्रवाल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी, डॉ. अमरेंद्र पाण्डे, डॉ. ऋचा शर्मा, डॉ. पुष्पराज भटेले तथा डॉ. दीपक साहू सहित अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे। वक्ताओं ने कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम, पीसीपीएनडीटी अधिनियम के सख्त पालन और नैतिक चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकता पर बल दिया।
नोडल अधिकारी डॉ. विनीता उप्पल ने पीसीपीएनडीटी अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों, पंजीकृत केंद्रों की जिम्मेदारियों और आवश्यक दस्तावेजों के संधारण की जानकारी दी। वहीं डॉ. पुष्पराज भटेले ने अभिलेख संधारण और दस्तावेजीकरण से जुड़ी शंकाओं का समाधान किया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती अनु बेनीवाल ने निरीक्षणों के दौरान सामने आए अनुभव साझा करते हुए सभी सोनोग्राफी केंद्रों और चिकित्सकों से अधिनियम के प्रत्येक प्रावधान का पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
कार्यशाला में डॉ. आदर्श बिश्नोई ने एएनएमओएल (ANMOL) पोर्टल की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए निजी अस्पतालों और नर्सिंग होमों को गर्भवती महिलाओं की शत-प्रतिशत एवं समयबद्ध ऑनलाइन प्रविष्टियां अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि गंभीर लापरवाही या प्रविष्टियां नहीं करने की स्थिति में संबंधित संस्थान के पंजीयन के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. आयुष धाकड़ ने मेड साक्ष्य (MedSakshya) पोर्टल के प्रभावी उपयोग की जानकारी देते हुए शासकीय चिकित्सकों को एमएलसी एवं पोस्टमार्टम प्रकरणों की समयबद्ध ऑनलाइन प्रविष्टियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके बाद डॉ. पंकज ग्रोवर ने पोर्टल का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अभिषेक गहलोत ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल पोर्टलों की उपयोगिता पर जोर देते हुए कहा कि निजी अस्पतालों को एएनएमओएल पोर्टल पर गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध प्रविष्टियां सुनिश्चित करनी होंगी, अन्यथा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी ने निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होमों को पीसीपीएनडीटी अधिनियम सहित सभी वैधानिक प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों से अनधिकृत राशि वसूली, अधिक बिलिंग और अन्य अनियमितताओं की शिकायतों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. आदर्श बिश्नोई ने किया, जबकि संपूर्ण व्यवस्थापन एवं समन्वय की जिम्मेदारी सौरभ चौहटेल ने निभाई। अंत में डॉ. शतधन दहिया ने आभार व्यक्त किया तथा अतिथियों का स्मृति-चिन्ह देकर सम्मान किया गया।
कार्यशाला के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम का प्रभावी पालन, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और नैतिक चिकित्सा सेवाएं ही कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम, लिंगानुपात में सुधार और स्वास्थ्य व्यवस्था में जनविश्वास मजबूत करने का आधार हैं।


