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October 26, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

वाहनों की बढ़ती संख्या से तमिलनाडु में सड़क हादसे भी बढ़े, 2025 में 71 हजार से ज्यादा दुर्घटनाएं

चेन्नई,  तमिलनाडु 2025 में भी राष्ट्रीय सड़क दुर्घटना चार्ट में शीर्ष पर बना रहा, जहां 71,000 से अधिक दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, हालांकि संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, कई अन्य प्रमुख वाहन-मालिक राज्यों की तुलना में तमिलनाडु में मृत्यु दर काफी कम रही। लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में 2025 में 71,387 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 18,505 लोगों की जान गई। ये आंकड़े केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने केरल के सांसद बेनी बेहनन के एक प्रश्न के उत्तर में दिए। राज्य में प्रति 100 दुर्घटनाओं पर लगभग 26 मौतें दर्ज की गईं। ताजा आंकड़े बताते हैं कि राज्य में सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2022 में 64,105 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं, जो तीन साल में 7,000 से अधिक बढ़कर 2025 में 71,387 तक पहुंच गईं। इससे सड़क सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं, जबकि प्रशासन की ओर से विभिन्न रोकथाम और निगरानी उपाय किए जा रहे हैं।

सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ा है, हालांकि इसकी रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही है। वर्ष 2022 में तमिलनाडु में 17,884 लोगों की मौत हुई थी। यह संख्या 2023 में बढ़कर 18,347 और 2024 में 18,449 हो गई। 2025 में मृतकों की संख्या और बढ़कर 18,505 पहुंच गई। तमिलनाडु में वाहनों की तेजी से बढ़ती संख्या को दुर्घटनाओं की उच्च संख्या के पीछे एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है। 1 अप्रैल 2025 तक राज्य में 3.76 करोड़ पंजीकृत वाहन थे, जो देश में उत्तर प्रदेश (5.05 करोड़ वाहन) और महाराष्ट्र (3.95 करोड़ वाहन) के बाद तीसरा सबसे अधिक आंकड़ा है। तमिलनाडु की तुलना में कम दुर्घटनाएं होने के बावजूद उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में मृत्यु दर और दुर्घटना दर का अनुपात क्रमशः 55.47 प्रतिशत और 49 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो काफी अधिक है।

केंद्र सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने के उद्देश्य से कई उपाय शुरू किए हैं। इनमें परिवहन वाहनों के लिए अनिवार्य गति सीमा उपकरण शामिल हैं, हालांकि दोपहिया, तिपहिया, चौपहिया, दमकल वाहन, एम्बुलेंस और पुलिस वाहनों जैसी श्रेणियों को छूट दी गई है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि तमिलनाडु में अपेक्षाकृत कम मृत्यु दर का कारण आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और चिकित्सा सुविधाओं की बेहतर उपलब्धता हो सकती है। हालांकि, तेज गति से वाहन चलाना, विशेष रूप से राजमार्गों पर, एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों ने गति नियंत्रण को और सख्त करने की मांग की है, यह बताते हुए कि आधुनिक वाहन राजमार्गों के लिए निर्धारित गति से काफी तेज गति से चलने में सक्षम हैं। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों ने तेज गति और शराब पीकर गाड़ी चलाने के साथ-साथ चालकों की थकान से निपटने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

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