110वीं जयंती पर बुंदेली दिवस समारोह में विभूतियों का सम्मान, रानी दुर्गावती पर नृत्य नाटिका ने बांधा समां
जबलपुर। बुंदेलखंड के लोक साहित्य, कला-संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में भाषाविज्ञानी एवं शिक्षाविद् डॉ. पूरनचंद श्रीवास्तव का योगदान अविस्मरणीय है। क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के संरक्षण के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किया। यह विचार गुंजन कला सदन एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा शहीद स्मारक भवन में आयोजित डॉ. श्रीवास्तव की 110वीं जयंती एवं बुंदेली दिवस समारोह में अतिथियों ने व्यक्त किए।
समारोह में दमोह सांसद राहुल सिंह लोधी, जेडीए अध्यक्ष संदीप जैन, संस्था संरक्षक अजय विश्नोई एवं नित्यनिरंजन खम्परिया उपस्थित रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और डॉ. श्रीवास्तव के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर प्रभा विश्वकर्मा शील, तरुणा खरे एवं डॉ. दीपक शुक्ला की पुस्तकों का विमोचन किया गया। डॉ. श्रीवास्तव के खंडकाव्य ‘वीरांगना रानी दुर्गावती’ पर आधारित नृत्य नाटिका का मोती शिवहरे के निर्देशन में मंचन किया गया।
समारोह में जयलोक के प्रधान संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार सच्चिदानंद शेकटकर, डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक रितेश कुमार विश्वकर्मा, डॉ. दीपक शुक्ला, डॉ. शिव कुमार व्यास, आईपीएस संपत उपाध्याय, नरसिंह पीठाधीश्वर नरसिंह देवाचार्य, जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष एडवोकेट मनीष मिश्रा सहित अनेक विभूतियों को सम्मानित किया गया।
सरदार एच.एस. चौपरा स्मृति बुंदेली नृत्यश्री प्रतियोगिता के सीनियर ग्रुप में आशिता कुमार एवं नताशा केशर को नृत्यश्री तथा आरोही चौरसिया को उप नृत्यश्री अलंकरण मिला। नृत्य गुरु सारंग शिवहरे एवं अंकिता गिनारा को भी सम्मानित किया गया। संचालन राजेश पाठक ‘प्रवीण’ ने किया।


