जबलपुर। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि आधुनिक तकनीक, नवाचार और सतत प्रशिक्षण को विभागीय कार्य-संस्कृति का हिस्सा बनाकर प्रदेश के अधोसंरचना विकास को नई गति दी जा सकती है। उन्होंने रविवार को भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आईआईटी बॉम्बे में 50 इंजीनियरों के लिए आयोजित ‘ट्रेनिंग से ट्रांसफॉर्मेशन’ वेबिनार का शुभारंभ किया।
मंत्री सिंह ने कहा कि केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। प्रशिक्षण के माध्यम से ज्ञान को व्यावहारिक दक्षता और बेहतर कार्य परिणामों में बदला जा सकता है। विभाग ने वर्ष 2026 के लिए विशेष प्रशिक्षण कैलेंडर, कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क और ट्रेनिंग नीड असेसमेंट तैयार किया है। आईआईटी बॉम्बे, सीआरआरआई नई दिल्ली, आईएएचई और ईएससीआई हैदराबाद सहित संस्थानों के सहयोग से करीब 1508 इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि आईआईटी बॉम्बे के साथ सड़क एवं पुल रखरखाव, कंक्रीट रोड, व्हाइट टॉपिंग, ब्रिज डिजाइन तथा प्रीफैब्रिकेटेड और प्रीकास्ट तकनीक में भी सहयोग लिया जाएगा।
सलाहकार प्रशांत पोल ने अभियंताओं को ‘लर्न, अप्लाई, शेयर एंड स्टैंडर्डाइज’ का सूत्र अपनाने की सलाह दी। डॉ. विक्रांत सिंह तोमर ने प्रशिक्षण के ज्ञान को धरातल पर जनकल्याणकारी परिणामों में बदलने पर जोर दिया। आईआईटी बॉम्बे के विशेषज्ञों ने निर्माण गुणवत्ता, रखरखाव और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जानकारी साझा की। सम्मेलन में प्रशिक्षण से दीर्घकालीन तकनीकी एवं शोध साझेदारी मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।


