लाइसेंस निरस्तीकरण के खिलाफ याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा- अपील का वैधानिक विकल्प उपलब्ध
जबलपुर। सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में शराब ठेकेदार सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। आबकारी विभाग द्वारा कंपोजिट शराब लाइसेंस निरस्त किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए दायर याचिका को जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि संबंधित आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता के पास वैधानिक अपील का विकल्प उपलब्ध है। ऐसे में सीधे हाईकोर्ट में दायर याचिका पर हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता नीलेश यादव और उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने याचिका की विचारणीयता पर आपत्ति उठाई। राज्य की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिका पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से दाखिल की गई है। साथ ही संबंधित याचिकाकर्ता के फरार होने की बात भी अदालत के समक्ष रखी गई।
मामला सागर में जहरीली शराब की घटना के बाद आबकारी विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से जुड़ा है। विभाग ने संबंधित शराब दुकान के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा का कंपोजिट शराब लाइसेंस निरस्त कर दिया था। इसी आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैधानिक अपील के वैकल्पिक उपाय को ध्यान में रखते हुए याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत के आदेश के बाद लाइसेंस निरस्तीकरण को चुनौती देने के लिए याचिकाकर्ता के पास संबंधित वैधानिक अपीलीय मंच का रास्ता खुला है। इस तरह फिलहाल हाईकोर्ट से ठेकेदार को कोई राहत नहीं मिली।


