बरघाट में बिल्डर की मनमानी: जनता को गुमराह कर बेची जा रही विवादित संपत्तियां।*बरघाट ( सिवनी)/नगर परिषद बरघाट भारतीय स्टेट बैंक के बाजू में वार्ड क्रमांक 08 में आवासीय अनुमति की आड़ में व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स निर्माण और उसे अवैध रूप से बेचने का एक बड़ा मामला सामने आया है। नगर परिषद द्वारा श्रीमती प्रगति पीयूष ठाकुर को कड़ा नोटिस जारी करते हुए साफ कर दिया गया है कि यदि अवैध व्याव सायिक गतिविधियां और बिक्री तुरंत नहीं रोकी गई, तो कॉम्प्लेक्स को तोड़ने एवं अनु मति निरस्त करने हेतु प्रकरण शासन को भेजने की कार्रवाई की जाएगी।
*आम जनता से सच छुपाकर धोखाधड़ी की तैयारी!*
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के भारतीय स्टेट बैंक के बाजू में, खसरा क्रमांक 330/8 में नगर परिषद से केवल आवासीय भवन निर्माण की स्वीकृति ली गई थी। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर यहाँ व्यावसायिक कमरे दुकानें तान दीये गए,अब तक इनमें से एक कमरा हरिओम मोबाइल को बेचकर मोटी रकम वसूल कर ली गई है। सबसे गंभीर बात यह है कि नगर परिषद की अनुमति से जुड़ी सच्चाई और नोटिसों की जानकारी आम जनता से छुपाकर तथा गलत तथ्य पेश करके बाकी बचे कमरों को भी बेचने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में यदि कोई अनजान व्यक्ति यहाँ दुकान या कमरा खरीदता है, तो भविष्य में उसे शासन-प्रशासन की कठोर बुलडोजर कार्रवाई और कानूनी पचड़ों का सामना करना पड़ सकता है।
*दो-दो नोटिस दरकिनार, लगातार जारी रही मनमानी*
नगर परिषद द्वारा नियमानुसार पूर्व में भी दो नोटिस जारी कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था, पहला नोटिस: पत्र क्रमांक 576, दिनांक 02/09/2026*
दूसरा नोटिस: पत्र क्रमांक 774, दिनांक 09/02/2026*
इन दोनों नोटिसों की अनदेखी करते हुए न केवल व्यावसायिक गतिविधियां जारी रखी गईं, बल्कि आम खरीदारों को गुमराह कर बिक्री की योजना भी बनाई जाती रही।
*शासन को प्रकरण भेजने और कॉम्प्लेक्स तोड़े जाने की सख्त चेतावनी*
नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा जारी ताज़ा नोटिस में अंतिम चेतावनी देते हुए कहा गया है: दुकानों के शटर निकलने दिए निर्देश 1 स्वीकृत आवासीय अनुमति के विपरीत किए गए कमरों का व्यावसायिक उपयोग और आगे की खरीद-बिक्री तत्काल प्रभाव से बंद की जाए,2 यदि निर्देशों का पालन नहीं होता है, तो मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 187(8) के तहत अवैध निर्माण/कॉम्प्लेक्स को तोड़े जाने (ढाहे जाने) की कार्रवाई की जाएगी। 3 इसके साथ ही भवन अनुमति निरस्त करने का प्रकरण शासन को प्रेषित किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी भवन स्वामी की होगी। अब देखने में ये दिलचस्प होगी कि नगर परिषद की यह सख्त चेतावनी सिर्फ कागजी नोटिसों तक ही सीमित रहती है या फिर जमीनी स्तर पर अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने और आम जनता को इस धोखाधड़ी से बचाने के लिए कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।


