करहीघाट स्टाप डैम से भू-जल स्तर में वृद्धि, खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए मिल रहा पर्याप्त पानी
शहडोल 11 अक्टूबर 2026- ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, संभाग शहडोल द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत ग्राम निपनिया, ग्राम पंचायत करऊँआताल, जनपद पंचायत सोहागपुर में करहीघाट स्टाप डैम का निर्माण कराया गया है। 47.51 लाख रुपये की स्वीकृत लागत से निर्मित इस स्टाप डैम से क्षेत्र में जल संग्रहण को बढ़ावा मिला है। इसके परिणामस्वरूप भू-जल स्तर में वृद्धि हुई है और किसानों को खेती के लिए सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध होने लगी है।
जल संग्रहण से खेती को मिला संबल
करहीघाट स्टाप डैम का निर्माण प्रशासकीय स्वीकृति क्रमांक 1756, दिनांक 28 अप्रैल 2022 के तहत कराया गया है। निर्माण एजेंसी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, संभाग शहडोल है। स्टाप डैम बनने से वर्षा जल का संग्रहण संभव हुआ है, जिससे किसानों को खरीफ एवं रबी दोनों फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने लगा है। इससे फसलों की पैदावार में वृद्धि की संभावनाएं बढ़ी हैं और कृषि कार्यों को मजबूती मिली है।
कुओं और हैंडपंपों के जल स्तर में भी हुआ सुधार
स्टाप डैम निर्माण से केवल कृषि क्षेत्र को ही लाभ नहीं मिला है, बल्कि आसपास के जल स्रोतों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। जल संग्रहण के कारण आसपास के कुओं एवं हैंडपंपों के जल स्तर में वृद्धि हुई है। इससे स्थानीय ग्रामीणों को पेयजल की सुविधा प्राप्त होने में मदद मिली है। साथ ही क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिला है।
13 किसानों को मिल रहा लाभ
स्टाप डैम के निर्माण से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिल रहा है। उपलब्ध हितग्राही सूची के अनुसार 13 किसानों की कुल 25.02 हेक्टेयर भूमि का विवरण दर्ज है। सिंचाई की सुविधा मिलने से कृषि उत्पादन बढ़ाने, खेती की लागत को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने तथा किसानों की आय में वृद्धि की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
करहीघाट स्टाप डैम ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण निर्माण कार्य है। इससे जल उपलब्धता में सुधार, कृषि गतिविधियों को बढ़ावा तथा ग्रामीणों की पेयजल संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिल रही है। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, संभाग शहडोल द्वारा कराया गया यह निर्माण कार्य जल संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में उपयोगी साबित हो रहा है।


