नई दिल्ली, 12 अक्टूबर । सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के इस्तीफे की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे बयानों की कड़ी निंदा की है। एसोसिएशन ने इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित करते हुए इसे न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला और न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप का प्रयास बताया है।
एससीबीए द्वारा जारी प्रस्ताव में कहा गया है, “सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन सोशल मीडिया पर प्रसारित उन बयानों की निंदा करता है, जिनमें भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश से इस्तीफे की मांग की जा रही है। हर व्यक्ति को कानून के अनुसार अदालतों का दरवाजा खटखटाने और उपचार मांगने का अवसर प्राप्त है। इस तरह के बयान न्यायपालिका संस्था को छोटा करते हैं और न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करने का प्रयास है।”
प्रस्ताव में कहा गया है कि एससीबीए अपने सभी सदस्यों और अन्य सभी व्यक्तियों से भारत के सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा और मर्यादा बनाए रखने का आह्वान करता है। यह प्रस्ताव एससीबीए की मानद सचिव प्रज्ञा बघेल द्वारा 12 अक्टूबर को जारी किया गया। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा सीजेआई के इस्तीफे की मांग को लेकर पोस्ट प्रसारित की जा रही थीं। यह मामला उस समय सामने आया जब विपक्षी ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में तकनीकी खामियां पाए जाने के बाद रजिस्ट्री ने उसे लिस्ट नहीं किया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर न्यायपालिका को लेकर कई तरह की टिप्पणियां की जाने लगीं।
एससीबीए का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है, जब न्यायपालिका पर सोशल मीडिया के जरिए दबाव बनाने की कोशिशें बढ़ रही हैं। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी को किसी फैसले या प्रक्रिया से आपत्ति है तो उसके लिए कानून में वैध रास्ता मौजूद है। सार्वजनिक रूप से इस्तीफे की मांग करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांत के भी खिलाफ है।
एससीबीए देश के वकीलों की सबसे बड़ी संस्थाओं में से एक है और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों का प्रतिनिधित्व करती है। इसके अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार राय हैं।
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