1652 से चली आ रही जवारा विसर्जन की परंपरा, नवरात्रि में स्थापित होते हैं करीब 700 कलश
जबलपुर। संस्कारधानी का प्राचीन बड़ी खेरमाई माता मंदिर धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यताओं के अनुसार, भानतलैया स्थित इस मंदिर का इतिहास करीब 800 वर्ष पुराना है। कल्चुरी काल से जुड़ी परंपराओं के अनुसार, मां खेरमाई को कुलदेवी और ग्रामदेवी के रूप में पूजा जाता रहा है।
मंदिर में प्राचीन शिला के ऊपर मां बड़ी खेरमाई की प्रतिमा विराजमान है। दाईं ओर काल भैरव और बाईं ओर हनुमान जी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर परिसर में कुल 24 मंदिर बताए जाते हैं, जहां भगवान गणेश, हनुमान जी, मां काली, मां दुर्गा, माता बंजारी और चौसठ योगिनी सहित विभिन्न देवी-देवताओं के दर्शन होते हैं। परिसर में तीन प्राचीन बावड़ियां और सैकड़ों वर्ष पुराना विशाल पीपल का वृक्ष भी मौजूद है।
1652 से जारी है जवारा विसर्जन
बड़ी खेरमाई मंदिर की प्रमुख परंपराओं में जवारा विसर्जन चल समारोह का विशेष महत्व है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, इसकी शुरुआत वर्ष 1652 की चैत्र नवरात्रि में हुई थी। उस समय जवारों का विसर्जन भानतलैया के बड़े ताल में किया जाता था। बाद में ताल समाप्त होने के बाद यह परंपरा हनुमानताल में शुरू हुई, जो आज भी जारी है।
नवरात्रि के 11वें दिन जवारा विसर्जन का चल समारोह निकाला जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। मंदिर में नवरात्रि के दौरान करीब 700 कलश स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।
ऐतिहासिक अभिलेखों में भी मंदिर का उल्लेख
मंदिर से संबंधित उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, वर्ष 1921-22 के बंदोबस्त रिकॉर्ड में मंदिर सेवा समिति को नजूल के पट्टे आवंटित किए जाने का उल्लेख मिलता है। वर्ष 1932-33 के ऐतिहासिक रिकॉर्ड में तत्कालीन ट्रस्टियों पंडित गौरीशंकर और गिरधारीलाल के नाम नजूल प्लॉट नंबर 182 का उल्लेख भी बताया गया है।
नवरात्रि में सुरक्षा के विशेष इंतजाम
नवरात्रि के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। दर्शन, पूजन और जवारा विसर्जन को व्यवस्थित बनाने के लिए करीब 250 स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी तय किए जाने की जानकारी है। मंदिर ट्रस्ट द्वारा आय-व्यय का लेखा-जोखा चार्टर्ड अकाउंटेंट से ऑडिट कराने की व्यवस्था भी बताई गई है।
प्राचीन शिला, ऐतिहासिक अभिलेख और सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं के कारण बड़ी खेरमाई मंदिर जबलपुर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पीढ़ियों से श्रद्धालु यहां मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते आ रहे हैं।
शीर्षक को अधिक प्रभावी बनाएं
खबर को संक्षिप्त और कसावदार करें
तथ्य और मान्यताएं अलग करें


