28.5 C
Jabalpur
October 16, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

बेंगलुरु स्पेशल कोर्ट ने पीएमएलए मामले में पूर्व आबकारी अधिकारी और बेटी को दोषी ठहराया, संपत्तियां जब्त



बेंगलुरु, 16 अक्टूबर  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बेंगलुरु जोनल ऑफिस को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बड़ी सफलता मिली है। बेंगलुरु की स्पेशल कोर्ट ने पूर्व आबकारी प्रभारी सब-इंस्पेक्टर एम. रामचंद्र और उनकी बेटी आर. युरेखा को पीएमएलए के तहत दोषी करार दिया है। 

यह फैसला 14 अक्टूबर को 47वें अतिरिक्त सिटी सिविल एंड सेशन जज और सीबीआई मामलों के स्पेशल जज की कोर्ट ने सुनाया। कोर्ट ने दोनों दोषियों को सजा सुनाते हुए 5 अचल संपत्तियों को केंद्र सरकार के पक्ष में जब्त करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह अपराध पूरे समाज के खिलाफ है।

एम. रामचंद्र (आरोपी नंबर 1) को 5 साल की कठोर कैद और 5 लाख रुपए जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना न भरने पर 2 साल की साधारण कैद होगी। वहीं उनकी बेटी आर. युरेखा (आरोपी नंबर 2) को 3 साल की कठोर कैद और 3 लाख रुपए जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना न भरने पर 1 साल की साधारण कैद भुगतनी होगी।

मामले की शुरुआत 7 जुलाई 2009 को कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर से हुई थी, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ई) के तहत दर्ज की गई थी। ईडी ने 26 अक्टूबर 2009 को एन्फोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट दर्ज किया। लोकायुक्त की चार्जशीट में 1 जुलाई 1977 से 8 जुलाई 2009 तक के चेक पीरियड को शामिल किया गया था।

ईडी ने 23 मार्च 2016 को 8 संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था, जिनकी कीमत 1,09,39,539 रुपए थी और जून 2016 में अभियोजन शिकायत दायर की थी।

इससे पहले मूल मामले में एम. रामचंद्र (आरोपी नंबर 1) को भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था और 3 साल की कठोर कैद और 50 लाख रुपए जुर्माने की सजा दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने उसकी आय से 42,48,188.50 रुपए यानी 97.75 प्रतिशत अधिक संपत्ति पाई थी।

कोर्ट ने कहा कि दोनों आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए की धारा 3 और 4 के तहत अपराध संदेह से परे साबित हुआ है। धारा 24 के तहत उपधारणा लागू किया गया, जिसे आरोपी खारिज करने में नाकाम रहे। उनकी दलीलें, जैसे विजयनगर में निर्माण का खर्च उनकी मां ने दिया और शारदा ने साइटें खरीदीं, दस्तावेजों से साबित नहीं हुईं।

सुप्रीम कोर्ट के विजय मदनलाल चौधरी फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने मूल मामले के फैसले पर भरोसा किया। कोर्ट ने कहा कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में पूरी अधिक संपत्ति ही अपराध से अर्जित आय है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मनी लॉन्ड्रिंग एक निरंतर चलने वाला अपराध है। जब तक अपराध की आय को रखा जाता है या बेदाग बताकर पेश किया जाता है, अपराध जारी रहता है, इसलिए पीएमएलए लागू होने से पहले के काम भी आरोप को खत्म नहीं करते। आरोपी नंबर 2 ने जानबूझकर अपने नाम पर अपराध की आय से खरीदी गई संपत्ति को रखने में मदद की।

सजा सुनाते हुए कोर्ट ने इसे गहरा सामाजिक प्रभाव वाला सफेदपोश आर्थिक अपराध माना, हालांकि सजा में आरोपी नंबर 1 की उम्र (लगभग 72 साल) और आरोपी नंबर 2 की पारिवारिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा गया।

अन्य ख़बरें

Nissan Pixo EV Unveiled in Europe, Offers Up to 259km Range; Deliveries to Begin in 2027

Newsdesk

नीति निर्माण में ‘पहली कक्षा’ से आगे नहीं बढ़ पाया बांग्लादेश: रिपोर्ट

Newsdesk

ट्विशा शर्मा डेथ केस : सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल की अदालत में सुनवाई पर लगाई रोक

Newsdesk

Leave a Comment

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading