गंगा स्व-सहायता समूह से 15 हजार रुपये का ऋण लेकर शुरू किया व्यवसाय, आज एक हजार मुर्गियों का कर रहीं पालन और हर महीने कमा रही हैं 30 हजार रुपये
===
शहडोल 17 अक्टूबर 2026- मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी ग्राम पंचायत बरेली की आजीविका दीदी राजकुमारी सिंह की है, जिन्होंने छोटे स्तर पर किराना दुकान शुरू कर अपने स्वरोजगार की यात्रा प्रारंभ की। आज वह किराना दुकान से आगे बढ़कर पोल्ट्री फार्म का संचालन कर रही हैं और मुर्गीपालन के व्यवसाय से प्रतिमाह लगभग 30 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। उनकी सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
15 हजार रुपये के ऋण से शुरू किया स्वरोजगार
राजकुमारी सिंह ने गंगा स्व-सहायता समूह से जुड़कर 15 हजार रुपये का ऋण लिया और उससे किराना दुकान का संचालन शुरू किया। उन्होंने मेहनत और लगन से दुकान को चलाया तथा उससे होने वाली आमदनी से ऋण भी चुका दिया। इसके बाद उन्होंने अपने व्यवसाय को विस्तार देने का निर्णय लिया। इसी क्रम में उन्होंने समूह से एक लाख रुपये का ऋण लेकर मुर्गीपालन का कार्य प्रारंभ किया।
राजकुमारी सिंह ने निरंतर मेहनत और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। आज उनके पोल्ट्री फार्म में लगभग एक हजार मुर्गियां हैं। किराना दुकान से शुरू हुआ उनका सफर अब मुर्गीपालन के व्यवसाय के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।
पोल्ट्री फार्म से हर महीने हो रही 30 हजार रुपये की आय
राजकुमारी सिंह पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन में ब्रॉयलर एवं देशी मुर्गियों का पालन कर रही हैं। मुर्गीपालन के साथ-साथ वह स्थानीय बाजारों में अंडों का विक्रय भी करती हैं, जिससे उन्हें आय के अतिरिक्त अवसर मिल रहे हैं। वर्तमान में वह इस व्यवसाय से प्रतिमाह लगभग 30 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
मुर्गियों के पोषण और देखभाल पर विशेष ध्यान
राजकुमारी सिंह अपने पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों के बेहतर पोषण और देखभाल का विशेष ध्यान रखती हैं। उनके भोजन में दाना, दलिया और सब्जियों जैसे खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जाता है। सर्दी से बचाव के लिए वह बिजली के बल्ब और ब्रूडर का इस्तेमाल करती हैं। मुर्गियों के पोषण, तापमान और देखभाल पर ध्यान देकर वह अपने व्यवसाय का व्यवस्थित संचालन कर रही हैं।
महिला मेट के रूप में भी निभा रहीं जिम्मेदारी
राजकुमारी सिंह ग्राम पंचायत बरेली में महिला मेट के रूप में भी अपना दायित्व निभा रही हैं। वह स्वरोजगार गतिविधियों के साथ अपनी जिम्मेदारियों का भी निर्वहन कर रही हैं। किराना दुकान से शुरू हुआ उनका सफर आज पोल्ट्री फार्म तक पहुंच चुका है। उनकी कहानी बताती है कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से मिलने वाली वित्तीय सहायता, मेहनत, लगन और सही दिशा में किए गए प्रयासों से ग्रामीण महिलाएं अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं तथा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।


