तेहरान, होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास समुद्री जहाजों पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) के अनुसार, रविवार सुबह यमन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के तट के पास दो जहाजों पर हमले हुए। इससे पहले शनिवार को ईरान के सुरक्षा बलों ने तीन जहाजों में आग लगने की सूचना दी थी। इनमें से दो जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के भीतर या उसके आसपास समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों की चपेट में आए थे।
यूकेएमटीओ की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 8 से 14 अक्टूबर के बीच करीब 14 जहाजों पर हमले हुए। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का युद्ध शुरू होने के बाद एक सप्ताह में जहाजों पर हमलों की यह सबसे अधिक संख्या बताई जा रही है। 11 अक्टूबर को एक ही दिन में कम से कम छह जहाजों को निशाना बनाया गया था।
लगातार हो रही इन घटनाओं के कारण समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। 1 मार्च से अब तक समुद्री सुरक्षा से जुड़ी दर्ज घटनाओं की संख्या बढ़कर 149 हो गई है। हमलों के बीच इस रणनीतिक मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
आंकड़ों के अनुसार, 8 से 14 अक्टूबर के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल 42 जहाज गुजरे, जबकि इससे पिछले सप्ताह यह संख्या 60 थी। इस मार्ग से गुजरने वाले अधिकांश जहाज पेट्रोलियम उत्पादों का परिवहन कर रहे थे।
जहाजों की आवाजाही में आई इस गिरावट से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर दबाव बढऩे की आशंका है। यदि सुरक्षा संबंधी खतरे लंबे समय तक बने रहते हैं, तो जहाजों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ सकते हैं। इससे परिवहन में देरी और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है।
यह घटनाक्रम ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहने के बीच सामने आया है। अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार, नाकेबंदी दोबारा लागू किए जाने के बाद से अमेरिकी सेना करीब 138 जहाजों का मार्ग बदलवा चुकी है।
क्षेत्र में जारी सैन्य तनाव और समुद्री जहाजों पर हमलों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। ऐसे हालात में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही, समुद्री बीमा और माल परिवहन की लागत पर असर पडऩे की आशंका है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। खाड़ी देशों से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में इस संकरे समुद्री मार्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही परिवहन लागत में वृद्धि और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम भी बढ़ सकता है। भारत समेत कई देशों के लिए खाड़ी क्षेत्र से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति महत्वपूर्ण है, इसलिए होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।


