September 3, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

यूपी के संभल में कई साल से बंद मंदिर खुला, प्राचीन मूर्तियां और कुआं मिला

संभल, 14 दिसंबर। उत्तर प्रदेश के संभल स्थित नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला दीपा सराय से सटे खग्गू सराय में कई साल से बंद पड़े एक पुराने शिव मंदिर को प्रशासन ने शनिवार को खुलवाया। इस मंदिर में भगवान की मूर्तियां विराजमान हैं। इसके अलावा यहां एक प्राचीन कुंआ भी मिला है। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में जब मंदिर के दरवाजे खोले गए तो देखा कि अंदर धूल जम चुकी है। ऐसे में पुलिसकर्मियों ने खुद ही हाथों से शिवलिंग और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां साफ की। मंदिर खोले जाने का वीडियो भी सामने आया है। पुलिस अधीक्षक के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि शनिवार सुबह बिजली और अतिक्रमण की रेड के दौरान इस मंदिर की जानकारी हुई। यह मंदिर काफी दिनों से बंद पड़ा था। उसे खुलवाया गया है। उन्होंने बताया कि मंदिर का दरवाजा खोलने पर अंदर हनुमान जी की प्रतिमा और शिवलिंग भी मिला। नगर हिंदू सभा के संरक्षक विष्णु शरण रस्तोगी ने बताया कि हम खग्गू सराय इलाके में रहते थे। हमारा एक घर पास में (खग्गू सराय इलाके में) है। 1978 के बाद हमने घर बेच दिया और जगह खाली कर दी। यह भगवान शिव का मंदिर है। हमने यह इलाका छोड़ दिया और हम इस मंदिर की देखभाल नहीं कर पाए। इस जगह पर कोई पुजारी नहीं रहता। उन्होंने बताया कि 15-20 परिवार इस इलाके को छोड़ कर चले गए। हमने मंदिर को बंद कर दिया था, क्योंकि पुजारी यहां नहीं रह सकते थे। पुजारी ने यहां रहने की हिम्मत नहीं की। अब, सालों बाद शनिवार को मंदिर को खोल दिया गया है। विष्णु सरन ने बताया कि पहले इस मंदिर में भजन-कीर्तन हुआ करते थे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिरीष चंद्र ने बताया कि यहां मंदिर परिसर के बाहर एक कुआं है। वह कुआं खुदाई करने पर मिला। कई चीजें और भी देखी जा रही है। संभल की एसडीएम वंदना मिश्रा ने बताया कि हम विद्युत चोरी के खिलाफ अभियान चला रहे थे और जगह-जगह जाकर चेक कर रहे थे, तो इस स्थान पर भी पहुंचे। यहां पर एक मंदिर दिखाई दिया। इसके बाद मैंने जिलाधिकारी से इस मंदिर को खोलने की अनुमति ली और अब हम सभी लोग इस मंदिर का निरीक्षण करने के लिए यहां आए हैं। मंदिर के अंदर हनुमान जी की मूर्ति और शिवलिंग पाए गए, जिन्हें स्थानीय लोगों ने बताया कि यह मंदिर 1978 से बना हुआ है।

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मैं भी बनूंगा कान्हा ..
“”””””””””””””””””””
मैं भी बनूंगा कान्हा जैसा,
जग में प्रेम बढ़ाऊंगा,
धरा मगन हो जाएगी ये,
जमकर धूम मचाऊंगा।
मैं भी बनूंगा कान्हा …
बंशी की एक धुन पर सारी,
गैय्या दौड़ी आएंगी,
भर-भर मटकी माखन-मिसरी,
मन-भर सभी खिलाएंगी।
मैं भी बनूंगा कान्हा ..
कहीं कदंब के पेड़ भी होंगे,
और कहीं यमुना की कल-कल ,
ध्यान धरा जो कान्हा का तो,
मुस्काएंगे वो पल-पल।
मैं भी बनूंगा कान्हा …
ठोकर खाकर जब-भी गिरूंगा,
मैया दौड़ी आएगी,
बाहों में भर लेगी फिर वो,
मन भर प्रेम जताएंगी।
मैं भी बनूंगा कान्हा …
“”””””””””””””””
कार्तिकेय कुमार त्रिपाठी ‘राम’
गांधीनगर इन्दौर (म.प्र.)

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