नागपुर में ह्यूमन मेटापन्यूमोवायरस (HMPV) के दो नए मामलों की पुष्टि हुई है, जिससे भारत में कुल मामलों की संख्या सात हो गई है। अन्य मामले कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु में दर्ज किए गए हैं। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में श्वसन संबंधी बीमारियों में कोई विशेष वृद्धि नहीं हुई है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
विशेषज्ञों के अनुसार, HMPV आमतौर पर हल्की बीमारी का कारण बनता है, जिसके लक्षण सर्दी-जुकाम जैसे होते हैं और यह 4-5 दिनों में ठीक हो जाती है। हालांकि, पांच साल से कम उम्र के बच्चों और 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों में यह बीमारी अधिक गंभीर हो सकती है। इस वायरस से मृत्यु दर बेहद कम है और इसे सामान्य रूप से खतरनाक नहीं माना जाता है।
सरकार ने देशभर में निगरानी प्रणाली को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। सभी राज्यों से इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण (ILI) और गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (SARI) के मामलों पर बारीकी से नजर रखने को कहा गया है। साथ ही, लोगों को श्वसन संक्रमणों से बचाव के उपाय अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने स्थिति की समीक्षा की है और कहा है कि भारत की स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भी आश्वस्त किया है कि देश में श्वसन संबंधी बीमारियों का कोई बड़ा खतरा नहीं है और सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
ICMR के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. रमन गंगाखेड़कर ने बताया कि HMPV घातक नहीं है और ज्यादातर मामलों में यह हल्के लक्षणों तक ही सीमित रहता है। उन्होंने कहा कि HMPV का वैश्विक प्रचलन लगभग 4% है, जिससे यह दुर्लभ संक्रमण माना जाता है।
सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में HMPV का जोखिम कम है, लेकिन निगरानी और सतर्कता बनाए रखने की आवश्यकता है। जनता को घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि जागरूक रहने और स्वास्थ्य उपायों का पालन करने की सलाह दी गई है।


