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सिवनी- जिले के सुदूर घंसौर क्षेत्र के एक छोटे से गांव में रहने वाले किसान राजेश पटेल ने अपनी मेहनत, दूरदर्शिता और सरकारी योजना के सही उपयोग से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। कभी घर-घर जाकर दूध बेचने वाले राजेश आज “गोमुख मिल्क” ब्रांड के सफल उद्यमी बन चुके हैं और कई लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं।
राजेश पटेल का जीवन पहले बेहद साधारण था। रोज सुबह पशुओं का दूध निकालकर वे गांव और आसपास के इलाकों में बेचते थे, लेकिन मेहनत के बावजूद उन्हें दूध का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। यही चिंता उनके मन में बदलाव की सोच लेकर आई।
एक दिन उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों से हुई मुलाकात ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। अधिकारियों ने उन्हें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के बारे में बताया और दूध के प्रसंस्करण के माध्यम से अधिक आय अर्जित करने का सुझाव दिया।
राजेश ने इस अवसर को पहचाना और योजना के तहत आवेदन किया। विभाग के मार्गदर्शन में उन्हें एसबीआई घंसौर शाखा से 19.30 लाख रुपये का ऋण तथा 8.45 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। यह उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
आर्थिक सहयोग मिलने के बाद राजेश ने अपने व्यवसाय को आधुनिक रूप दिया। उन्होंने बुल्क मिल्क कूलर, पाश्चुरीकरण मशीन, पनीर एवं खोवा बनाने की मशीन और दूध पैकिंग मशीन जैसी अत्याधुनिक इकाइयां स्थापित कीं। इसके साथ ही उन्होंने “गोमुख मिल्क” नाम से अपना ब्रांड लॉन्च किया, जिसने स्थानीय बाजार में तेजी से पहचान बनाई।
आज राजेश पटेल दूध के साथ-साथ पनीर, खोवा, दही और घी जैसे उत्पाद तैयार कर रहे हैं। आकर्षक पैकेजिंग और गुणवत्ता के कारण उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
सबसे खास बात यह है कि राजेश की इस सफलता से आसपास के अन्य दुग्ध उत्पादकों को भी लाभ मिल रहा है। उनके साथ जुड़कर कई लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं और अपनी आय में वृद्धि कर रहे हैं।
राजेश पटेल की सफलता कहानी यह दर्शाती है कि यदि सही दिशा, सरकारी योजनाओं का लाभ और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को बदल सकता है। घंसौर का यह युवा आज क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुका है।


