जबलपुर। जमतरा गांव में नर्मदा नदी से रेत निकालने के दौरान डूबने से युवक की मौत के बाद मंगलवार को ग्रामीणों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही मृतक मानक वर्मा का शव गांव पहुंचा, सैकड़ों ग्रामीण इकट्ठा हो गए और जबलपुर-मंडला रोड पर चक्काजाम कर दिया।
जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस-प्रशासन की टीम को देखकर मानक वर्मा नदी में कूद गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद से ही ग्रामीणों में आक्रोश था। मंगलवार को ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एक सिपाही ने युवक को जानबूझकर नदी में धकेला, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग भी की गई।
चक्काजाम के चलते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाइश देते हुए स्थिति को नियंत्रित किया। अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया और राहत राशि देने की बात कही, जिसके बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया।
एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। मृतक के परिवार को रेडक्रॉस फंड से 1 लाख रुपये की सहायता दी गई है, जबकि शासन की ओर से नदी में डूबने के मामलों में मिलने वाली 4 लाख रुपये की सहायता राशि भी प्रदान की गई है। मामले में मर्ग कायम कर जांच जारी है।
परिजनों का आरोप है कि मानक वर्मा को टीम ने घेर लिया था, जिसके कारण वह डरकर नदी में कूद गया। उनका कहना है कि यदि टीम केवल वाहन जब्ती की कार्रवाई करती, तो उसकी जान बच सकती थी। ग्रामीणों ने बड़े खनन माफिया को संरक्षण मिलने और छोटे स्तर पर कार्रवाई होने के आरोप भी लगाए हैं। फिलहाल प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है और स्थिति को नियंत्रण में बताया जा रहा है।


