न्यूयॉर्क, 4 मार्च। अमेरिकी शोधकर्ताओं की एक टीम ने ब्राउन फैट पर किए अध्ययन में पता लगाया है कि यह लोगों को उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक रूप से फिट रहने में मदद कर सकता है। यह अध्ययन रटगर्स यूनिवर्सिटी के न्यू जर्सी मेडिकल स्कूल की टीम द्वारा किया गया था। टीम ने पाया कि एक विशिष्ट जीन की कमी वाले चूहों ने ब्राउन फैट का एक अत्यधिक शक्तिशाली रूप विकसित किया, जिससे उनके जीवनकाल में वृद्धि हुई और उनकी कार्य क्षमता में लगभग 30 प्रतिशत का सुधार हुआ। इस खोज के आधार पर, टीम एक दवा पर काम कर रही है जो मनुष्यों में इन प्रभावों की नकल कर सकती है।
यूनिवर्सिटी प्रोफेसर और एजिंग सेल में प्रकाशित अध्ययन के वरिष्ठ लेखक स्टीफन वैटनर स्टीफन वैटनर ने कहा, “जैसे-जैसे आप बड़े होते हैं, कार्य क्षमता कम होती जाती है और इस क्षमता को बढ़ाने वाली तकनीक का होना स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए बहुत फायदेमंद होगा।” उन्होंने यह भी कहा, “यह माउस मॉडल अपने सामान्य साथियों की तुलना में बेहतर वर्क करता है।” ब्राउन फैट, सफेद वसा के विपरीत, कैलोरी जलाने का काम करता है और शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है। इस अध्ययन से यह भी पता चला कि ब्राउन फैट शारीरिक गतिविधि के दौरान मांसपेशियों में रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाकर व्यायाम क्षमता को बढ़ाता है।
आनुवंशिक रूप से संशोधित चूहे असामान्य रूप से अधिक सक्रिय ब्राउन फैट का उत्पादन करते थे और सामान्य चूहों की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत बेहतर वर्क क्षमता न दिखाते थे, गति और थकावट के समय दोनों में। यह खोज स्वस्थ उम्र बढ़ने पर किए गए शोध का हिस्सा है। इनमें आरजीएस14 नामक प्रोटीन की कमी वाले चूहे सामान्य चूहों की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक समय तक जीवित रहते थे, और मादा चूहे नर की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहते थे, जो मानव जीवन के पैटर्न जैसा था। इस अध्ययन से यह उम्मीद जताई जा रही है कि यह खोज मानव जीवनकाल में सुधार कर सकती है, जिससे लोग लंबे समय तक अच्छे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का आनंद ले सकेंगे।
वैटनर ने कहा, “सभी चिकित्सा प्रगति के साथ, मनुष्यों में उम्र बढ़ने और दीर्घायु में वृद्धि हुई है, लेकिन दुर्भाग्य से, स्वस्थ उम्र बढ़ने में कोई वृद्धि नहीं हुई है।” उन्होंने यह भी बताया कि उम्र बढ़ने से जुड़ी कई बीमारियां जैसे मोटापा, मधुमेह, दिल की बीमारियां, कैंसर आदि हैं, और स्वस्थ उम्र बढ़ने के मॉडल पर आधारित नई दवाओं का विकास करना आवश्यक है।


