30.8 C
Jabalpur
June 22, 2026
सी टाइम्स
जीवनशैलीटेक्नोलॉजीसी टाइम्स

सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग से भारत के युवाओं में तेजी से बढ़ रही है सोशल एंग्जायटी

भारत में स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट ने जहां एक ओर युवाओं की जिंदगी को डिजिटल रूप से समृद्ध किया है, वहीं इसका एक चिंताजनक पहलू भी सामने आया है। मनोचिकित्सकों और विशेषज्ञों की ताजा रिपोर्टों के अनुसार सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के कारण युवाओं में सोशल एंग्जायटी (सामाजिक चिंता) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

हाल ही में प्रकाशित भारत के आर्थिक सर्वेक्षण 2024 में कहा गया है कि छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ बढ़ी हैं, जिसमें सोशल मीडिया और इंटरनेट की लत को प्रमुख कारण बताया गया है। सर्वे के अनुसार 11 प्रतिशत छात्र नियमित रूप से चिंता महसूस करते हैं, जबकि 14 प्रतिशत गंभीर मूड स्विंग से जूझ रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर लगातार तुलना और “लाइक्स” पाने की दौड़ युवाओं में हीन भावना और चिंता पैदा कर रही है। एस्ट्रर सीएमआई अस्पताल की चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट डॉ. सुषमा गोपालन ने बताया, “लंबे समय तक सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले युवा अक्सर चिंता, डिप्रेशन और आत्मसम्मान की कमी से पीड़ित होते हैं। वे ऑनलाइन दुनिया की अपेक्षाओं और वास्तविक जीवन के बीच सामंजस्य नहीं बैठा पाते।”

भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के एक सर्वे में खुलासा हुआ कि करीब 65 प्रतिशत युवा ऑनलाइन इन्फ्लुएंसर्स से तुलना करते हैं, जिससे उनमें खुद को “कमतर” समझने की भावना बढ़ रही है। वहीं, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) के मुताबिक लगभग 27 प्रतिशत युवा सोशल मीडिया पर निर्भरता के लक्षण दिखा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया की लत युवाओं में सीधे संवाद करने की क्षमता घटा रही है। इससे वास्तविक जीवन में लोगों से मिलना-जुलना युवाओं के लिए कठिन हो रहा है, जिससे सामाजिक अलगाव और अकेलापन बढ़ रहा है।

भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन, जापान जैसे देशों में भी इसी प्रकार की चिंताजनक स्थिति देखने को मिली है। अमेरिकी सर्जन जनरल ने 2023 में इस समस्या पर एडवाइजरी जारी करते हुए कहा था कि रोजाना तीन घंटे से अधिक सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा दोगुना होता है।

सोशल मीडिया के मानसिक दुष्प्रभावों से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने युवाओं, परिवारों, स्कूलों और तकनीकी कंपनियों के संयुक्त प्रयास पर जोर दिया है। डिजिटल जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा, और सोशल मीडिया का संतुलित इस्तेमाल करने के प्रति जागरूकता बढ़ाना इस समस्या से निपटने के प्रमुख उपाय हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल बेहद जरूरी है ताकि युवा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही दुनिया में स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकें।

अन्य ख़बरें

मेडिटेशन के दौरान न करें ये 5 गलतियां,

Newsdesk

हर महिला की किट में होने चाहिए शामिल , मेकअप के लिए जरूरी हैं ये 5 टूल्स,

Newsdesk

22 जून का पंचांग: अभिजित मुहूर्त में सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक करें शुभ काम, पूर्व में जाने से बचें

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading