Aman Gupta – देशी वेअरेबल्स ब्रांड boAt की मूल कंपनी Imagine Marketing ने सोमवार को शेयर बाजार नियामक सेबी (SEBI) के पास प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (IPO) के लिए गोपनीय प्री-फाइलिंग रूट के जरिए ड्राफ्ट पेपर्स दाखिल किए हैं।
यह अमन गुप्ता द्वारा संचालित कंपनी का दूसरी बार आईपीओ लाने का प्रयास है। इससे पहले, 2022 में कंपनी ने एक पूर्ण ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया था, लेकिन बाद में उस योजना को टाल दिया गया था।
गोपनीय फाइलिंग रूट के तहत कंपनियां अपने आईपीओ की योजना बिना शुरुआती चरण में सारी जानकारी सार्वजनिक किए दाखिल कर सकती हैं। DRHP केवल एक बाद के चरण में सार्वजनिक किया जाता है।
कंपनी द्वारा जारी सूचना के अनुसार, यह फाइलिंग सेबी के “Issue of Capital and Disclosure Requirements Regulations” के तहत की गई है। प्रस्तावित IPO के जरिए Imagine Marketing अपने इक्विटी शेयर भारतीय स्टॉक एक्सचेंज के मेनबोर्ड पर सूचीबद्ध कराएगी।
पहले की योजना:
जनवरी 2022 में कंपनी ने ₹2,000 करोड़ के आईपीओ की योजना बनाई थी, जिसमें ₹900 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹1,100 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल था।
अब कंपनी ने पारंपरिक पद्धति के बजाय गोपनीय फाइलिंग का विकल्प चुना है और स्पष्ट किया है कि DRHP दाखिल करने का मतलब यह नहीं कि आईपीओ अवश्य ही आएगा।
Read This Also – गोपनीय फाइलिंग क्या होती है? भारत में किन कंपनियों ने गोपनीय फाइलिंग की है?
boAt की पृष्ठभूमि:
Imagine Marketing की स्थापना 2013 में अमन गुप्ता और समीर मेहता ने की थी। कंपनी boAt ब्रांड के तहत ऑडियो डिवाइसेज़, स्मार्ट वियरेबल्स, पर्सनल ग्रूमिंग प्रोडक्ट्स और मोबाइल एक्सेसरीज़ जैसे कई उपभोक्ता तकनीकी उत्पाद बेचती है।
गोपनीय फाइलिंग का बढ़ता चलन:
अब अधिक से अधिक भारतीय कंपनियां इस गोपनीय रास्ते को अपना रही हैं। हाल ही में Tata Capital और Edtech कंपनी PhysicsWallah ने भी यही तरीका अपनाया।
2024 में Swiggy और Vishal Mega Mart ने भी इसी प्रक्रिया से शुरुआत कर सफलतापूर्वक शेयर बाजार में प्रवेश किया। वहीं Oyo और Tata Play ने गोपनीय फाइलिंग के बाद आईपीओ लाने का विचार छोड़ दिया।
विशेषज्ञों की राय:
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका कंपनियों को अधिक लचीलापन और समय देता है। पारंपरिक प्रक्रिया में जहां 12 महीनों के भीतर आईपीओ लाना जरूरी होता है, वहीं गोपनीय मार्ग से यह समय सीमा 18 महीने की हो जाती है। साथ ही, अंतिम दस्तावेज जारी करने से पहले कंपनी आईपीओ के आकार में 50% तक बदलाव कर सकती है।


