कर्नाटक के मैंगलुरु की एक पारिवारिक अदालत ने एक व्यक्ति को उसकी पत्नी की क्रूरता और द्विविवाह के आधार पर तलाक की अनुमति दे दी है। इस मामले में अदालत ने पत्नी को कोई गुज़ारा भत्ता या स्थायी भरण-पोषण राशि नहीं देने का आदेश भी दिया।
यह फैसला मैंगलुरु पारिवारिक अदालत के प्रधान न्यायाधीश लक्ष्मीनारायण भट के. ने सुनाया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, “प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, यह साबित होता है कि याचिकाकर्ता (पति) को उत्तरदायी (पत्नी) द्वारा द्विविवाह और मानसिक उत्पीड़न के कारण क्रूरता झेलनी पड़ी। उत्तरदायी को किसी प्रकार का स्थायी भरण-पोषण या गुज़ारा भत्ता पाने का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ता को तलाक की डिक्री दी जाती है।”
पति बना जासूस, किया पत्नी की दूसरी शादी का पर्दाफाश
मुदबी हाउस, मैंगलुरु के निवासी उदय नायक ने अपनी पत्नी से तलाक की अर्जी हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(i-a) के तहत दी थी, जिसमें उन्होंने मानसिक क्रूरता और धोखे का हवाला दिया।
नायक ने पत्नी की दूसरी शादी का पता लगाने के लिए खुद जांच-पड़ताल की और एक फर्जी नौकरी साक्षात्कार आयोजित कर उसमें ज़ूम मीटिंग के माध्यम से पत्नी से दूसरी शादी की बात कबूल करवा ली।
पत्नी ने पति से ₹3 करोड़ की मांग की थी, लेकिन अदालत ने न केवल इसे ठुकरा दिया बल्कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे का सोना वापस लौटाने और पत्नी को ₹30,000 पति के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया।
पति ने लगाया गंभीर आरोप
उदय नायक ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी की शादी से पहले किसी अन्य पुरुष से संबंध थे और वह शादी के बाद भी जारी रहे। उन्होंने बताया कि पत्नी गर्भपात के लिए ज़ोर देती रही जिससे उन्हें और उनके परिवार को मानसिक पीड़ा हुई। एक बार पत्नी ने झूठा घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया, वह भी उसकी बहन की शादी से ठीक एक सप्ताह पहले।
पत्नी ने महाराष्ट्र में 13 मार्च 2023 को दूसरी शादी की और नाम बदलने के लिए आवेदन भी किया जिसकी सूचना महाराष्ट्र शासन राजपत्र में प्रकाशित हुई।
पत्नी ने भी लगाए पलटवार के आरोप
पत्नी ने अदालत में कहा कि पति ने उसे गर्भपात के लिए मजबूर किया, शादीशुदा जीवन से बाहर कर दिया और उस पर अप्राकृतिक यौन संबंध के लिए ज़बरदस्ती की। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि पति ने अपने दोस्तों के साथ संबंध बनाने के लिए दबाव डाला।
अदालत ने पत्नी के आरोपों को बताया बेबुनियाद
अदालत ने कहा कि क्रॉस एग्ज़ामिनेशन के दौरान पत्नी इन गंभीर आरोपों को साबित नहीं कर सकी। इसके अलावा, यह भी स्पष्ट हुआ कि उसने बिना पति की मर्ज़ी के गर्भपात करवाया, शादी के बाद ज़िम्मेदारियों से भागती रही, सोशल मीडिया में व्यस्त रहती थी और पति व उसके परिवार पर झूठा केस किया।
जज ने कहा कि पत्नी ने पति के जीवित रहते हुए दूसरी शादी की जो कि द्विविवाह (Bigamy) के अंतर्गत अपराध है और उसे किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता की पात्रता नहीं है।
यह ऐतिहासिक फैसला 23 अप्रैल को सुनाया गया और मंगलवार को इसके प्रमाणित दस्तावेज प्राप्त हुए। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील विशाल शेट्टी ने पैरवी की।


