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May 28, 2026
सी टाइम्स
क्राइमप्रादेशिक

अन्ना विवि यौन उत्पीडऩ मामले में आया फैसला, दोषी गणानासेकरन को 30 साल आजीवन कारावास

Anna University sexual assault case: Court sentences sole convict to life imprisonment

तमिलनाडु के सबसे गंभीर यौन शोषण मामलों में से एक में सोमवार को चेन्नई महिला न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए एकमात्र दोषी ए. ज्ञानसेकरन को उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने आदेश दिया कि उसे बिना किसी राहत के कम से कम 30 साल तक जेल में रहना होगा।

दोषी पर ₹90,000 का जुर्माना भी लगाया गया है।

ज्ञात हो कि ज्ञानसेकरन, जो अन्ना यूनिवर्सिटी के महिला सशक्तिकरण केंद्र में अस्थायी कर्मचारी के रूप में कार्यरत था और बिरयानी बेचने का काम करता था, को दिसंबर 2024 में एक महिला छात्रा की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया गया था।

यह घटना सामने आने के बाद पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया था। छात्र संगठनों और महिला अधिकार संगठनों ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किए थे।

महिला न्यायालय ने 28 मई को ज्ञानसेकरन को दोषी ठहराया था।

सरकारी वकील द्वारा प्रस्तुत ठोस दस्तावेजी और फोरेंसिक सबूतों — जैसे कि सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड — के आधार पर अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ने मामले को “संदेह से परे” सिद्ध कर दिया है। न्यायाधीश राजलक्ष्मी ने सुनवाई के बाद 2 जून को सजा सुनाने के लिए फैसला सुरक्षित रखा था।

अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता और समाज पर उसके प्रभाव को देखते हुए “अधिकतम सज़ा” की मांग की थी।

यह मामला 23 दिसंबर 2024 को सामने आया था जब पीड़िता ने चेन्नई के कोट्टूरपुरम महिला थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि रात के समय एक पुरुष मित्र के साथ होने पर ज्ञानसेकरन ने उसे धमकाया और फिर यौन शोषण किया।

जनता के गुस्से और जांच प्रक्रिया में खामियों के आरोपों के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की जांच एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दी थी, जिसने प्राथमिकी (FIR) लीक होने की जांच भी की।

एसआईटी ने फरवरी 2025 में मजिस्ट्रेट के समक्ष विस्तृत चार्जशीट दायर की थी। इसके बाद 7 मार्च को यह मामला सुनवाई के लिए महिला न्यायालय को स्थानांतरित किया गया।

आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था, जिनमें शामिल हैं:

  • धारा 329 (आपराधिक अतिक्रमण),

  • धारा 126(2) (गलत तरीके से रोकना),

  • धारा 87 (महिला का अपहरण),

  • धारा 64(1) (बलात्कार)।

इसके अलावा उस पर आईटी अधिनियम की धारा 66 और तमिलनाडु महिला उत्पीड़न निवारण अधिनियम की धारा 4 के तहत भी केस दर्ज किया गया था।

यह फैसला महिलाओं के खिलाफ अपराध और संस्थागत स्थानों के दुरुपयोग पर एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

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