November 2, 2026
सी टाइम्स
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जबलपुर – थैलेसीमिया व सिकलसेल पीड़ितों के लिए जबलपुर का नि:शुल्क डे केयर सेंटर बना संजीवनी एक वर्ष में 380 सफल ब्लड ट्रांसफ्यूजन, 64 बच्चों का हुआ इलाज

Jabalpur News Today। थैलेसीमिया और सिकलसेल जैसी गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के लिए जबलपुर का शीतल छाया हॉस्पिटल में संचालित मध्य प्रदेश का पहला नि:शुल्क डे केयर सेंटर राहत की किरण बनकर उभरा है। सेंटर की प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित स्वास्थ्य शिविर में लगभग 40 बच्चों का नि:शुल्क परीक्षण किया गया।

इस विशेष शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने पीड़ित बच्चों का संपूर्ण स्वास्थ्य मूल्यांकन किया और उन्हें आगे के उपचार, जीवनशैली, पोषण और दवाओं के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।

विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और नि:शुल्क परामर्श
  • थैलेसीमिया और सिकलसेल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता पाठक ने बच्चों को आगे की दवाएं और देखरेख संबंधी विस्तृत जानकारी दी।

  • हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्पराज पटेल ने बच्चों की हृदय जांच की और समय-समय पर ईसीजी एवं अन्य जरूरी परीक्षण कराने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पीड़ित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण इलाज मिले, इसके लिए वे हरसंभव सहयोग करेंगे।

अतिथियों ने सराहा प्रयास, दिया सहयोग का आश्वासन

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे:

  • महापौर श्री जगत बहादुर सिंह ‘अन्नू’,

  • नगर निगम अध्यक्ष श्री रिकुंज (रिंकू) विज,

  • वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हरजीत कौर बंसल और

  • डॉ. अमरदीप बंसल,
    जिन्होंने डे केयर सेंटर के कार्यों की प्रशंसा की।

इन अतिथियों ने संस्था के प्रयासों को सराहते हुए आश्वासन दिया कि वे:

  • सरकारी योजनाओं के लाभ पीड़ितों तक पहुंचाने में सहयोग करेंगे,

  • थैलेसीमिया व सिकलसेल के प्रति जनजागरूकता अभियान में सक्रिय भागीदारी करेंगे।

परिजनों ने बताया सेंटर ने बदली जिंदगी

कार्यक्रम में मौजूद कई पीड़ित बच्चों के अभिभावकों ने अपने अनुभव साझा किए। उनका कहना था कि पहले वे इलाज के लिए जबलपुर से बाहर भटकते थे, लेकिन अब इसी शहर में एक ऐसा सेंटर उपलब्ध है, जहां निःशुल्क, नियमित और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल रहा है। इससे न सिर्फ आर्थिक भार कम हुआ, बल्कि बच्चों की सेहत में भी सुधार देखा गया है।

एक वर्ष में 380 ब्लड ट्रांसफ्यूजन सफलतापूर्वक
  • डे केयर सेंटर ने अपने एक वर्ष के कार्यकाल में अब तक:

    • 64 थैलेसीमिया-सिकलसेल पीड़ित बच्चों का परीक्षण किया।

    • इनमें से 40 बच्चों का नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया जा रहा है।

    • अब तक कुल 380 ब्लड ट्रांसफ्यूजन सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं।

यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि यह सेंटर थैलेसीमिया और सिकलसेल रोगियों के लिए एक प्रभावशाली और भरोसेमंद केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है।

संस्था और समाजसेवियों का योगदान

मप्र थैलेसीमिया जनजागरण समिति द्वारा आयोजन में सहयोग देने वाले प्रमुख नामों का आभार व्यक्त किया गया, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • डॉ. श्वेता पाठक,

  • शीतल छाया हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. शशांक पांडे व शिशिर पांडे,

  • प्रदेश अध्यक्ष विकास शुक्ला,

  • जिला अध्यक्ष राहुल तिवारी,

  • डॉ. संजय असाटी,

  • अजय घोष,

  • योगांश सेवानी,

  • दीक्षा चौरसिया,

  • पंकज सिंह,

  • प्रांजल तिवारी,

  • शिव मौर्या,

  • मोहित संघी,

  • प्रशांत विनोदिया,

  • कपिल थाडानी,

  • कौशल दीक्षित,

  • इलुविंदर छाबड़ा,

  • एवं अन्य सामाजिक कार्यकर्ता।

थैलेसीमिया और सिकलसेल जैसी बीमारियों से ग्रसित बच्चों को जबलपुर जैसे शहर में नि:शुल्क उपचार व परामर्श की सुविधा मिलना एक बड़ी उपलब्धि है। शीतल छाया हॉस्पिटल का यह डे केयर सेंटर अब आशा का केंद्र बन गया है। आने वाले वर्षों में यह सेंटर न केवल और अधिक बच्चों की जान बचाने का माध्यम बनेगा, बल्कि थैलेसीमिया मुक्त समाज की दिशा में भी एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभरेगा।

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