देखकर हमारी उड़ान आसमां भी हो जाएगा हैरान
नहीं है हमारे परों पर थकान का कोई भी निशान
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं की इससे बढ़िया प्रशंसा हो ही नहीं सकती पर क्या ऐसा कहने में और वास्तविकता में जमीन आसमान का फर्क है?
जी हां जरूर है इसे में एक घटना के माध्यम से आपको बताती हूं।
एक बड़े से डिपार्टमेंटल स्टोर पर काउंटर पर बैठी एक युवती सामने खड़ी अधेड़ महिला से कैश ले रही थी उसमें ₹2 कम थे अधेड़ महिला ने कहा कि मेरे पास ₹2 चेंज नहीं है ₹100 की चेंज करानी पड़ेगी pमैं तो इसी दुकान पर आती हूं अगली बार ₹2 ले लेना पर उस युवती ने कहा “नहीं मैं ₹2 नहीं छोड़ सकती हूं मेरे पति नाराज होंगे” अधेड़ महिला ने ₹100 का नोट दिया और गुस्से से बोली” तुम भी तो दुकान की मालकिन हो क्या तुम्हें ₹2 छोड़ने का भी अधिकार नहीं मिला है अपने पति से”
“अब आपको क्या बताऊं” बड़े ही धीमी और उदास आवाज में उसने कहा लेकिन इस धीमी और उदास आवाज के साथ उसकी तेज खामोशी कह रही थी की महिलाओं का सिर्फ शिक्षित और जागरूक होना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर भी बनना होगा|
लेखक – डॉ कामना तिवारी श्रीवास्तव



2 comments
वाह शानदार
Kash esa ho